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आज की विशेष कहानी

जीवन और संघर्ष:आज का सुविचार — केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

मनुष्य जीवन में संघर्ष और समस्याएं, ऐसी दो कड़ियाँ हैं, जिनके साथ प्रत्येक प्राणी रहकर एक दिन इस संसार से अचानक ही अलविदा हो जाता है ।                              केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) प्रिय पाठकों ऐसे ही सुविचार और कविता, कहानी, मनोरंजन की खबरें , इत्यादि जानकारी के लिए हमारे इस साइट को subscribe करे, लेखक के हौसला बढ़ाने के लिए कमेंट जरूर करें।

The Kerala Story 2: क्या फिर दोहराएगी 300 करोड़ वाला इतिहास?

300 करोड़ की सफलता के बाद क्या 'The Kerala Story 2' रचेगा नया इतिहास? The Kerala Story जब सिनेमाघरों में आई, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बहस, जिज्ञासा और बॉक्स ऑफिस की बड़ी कहानी बन जाएगी। सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ से अधिक की कमाई कर भारतीय सिनेमा में अपनी अलग जगह बना ली। यह उपलब्धि सिर्फ कमाई का आंकड़ा नहीं थी, बल्कि इस बात का प्रमाण थी कि दमदार विषय और प्रभावशाली प्रस्तुति बड़े सितारों के बिना भी दर्शकों तक पहुंच सकती है। इस फिल्म की सफलता के पीछे निर्देशक Sudipto Sen और निर्माता Vipul Amrutlal Shah की जोड़ी की बड़ी भूमिका रही। विपुल शाह ने इस फिल्म को सिर्फ प्रोड्यूस नहीं किया, बल्कि एक ऐसे विषय को बड़े पर्दे पर लाने का साहस दिखाया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर किया। पहले भाग की सफलता की असली ताकत यह रही कि उसने लोगों को प्रतिक्रिया देने पर मजबूर किया। कुछ ने समर्थन किया, कुछ ने आलोचना, लेकिन फिल्म को नजरअंदाज कोई नहीं कर पाया। यही वजह है कि दूसरा भाग अब सिर्फ सीक्वल नहीं, एक विरासत को आगे बढ़ाने की तरह दे...

भूत बंगला का बॉक्स ऑफिस जादू: 100 करोड़ क्लब में पहुंची हॉरर-कॉमेडी की नई सनसनी

डर, हंसी और शानदार कमाई के साथ ‘भूत बंगला’ ने दर्शकों का दिल जीता, जानिए 100 करोड़ तक पहुंचने की पूरी कहानी। आजकल जब भी सिनेमा की बात होती है, एक नाम बार-बार चर्चा में सुनाई दे रहा है— भूत बंगला। यह फिल्म सिर्फ एक हॉरर-कॉमेडी नहीं रही, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसी कहानी बन गई जिसने सबको चौंका दिया। नौ दिनों में 100 करोड़ क्लब तक पहुंचना किसी भी फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि है, और यही वजह है कि दर्शकों के बीच इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है। फिल्मों की दुनिया में सफलता सिर्फ बड़े बजट या बड़े स्टार्स से नहीं मिलती, बल्कि कहानी, प्रस्तुति और दर्शकों के जुड़ाव से बनती है। ‘भूत बंगला’ ने यही साबित किया। इसमें डर है, रहस्य है, कॉमेडी है और सबसे बड़ी बात—मनोरंजन है। यही कारण है कि दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। शुरुआत में शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म इतनी बड़ी कमाई करेगी। लेकिन जैसे-जैसे दर्शकों के बीच इसका क्रेज बढ़ा, टिकट खिड़की पर भी भीड़ बढ़ती गई। पहले वीकेंड में फिल्म ने शानदार कमाई की और फिर वर्ड ऑफ माउथ ने इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी कहानी मानी जा रही ...

खलनायक रिटर्न्स: 33 साल बाद लौटेगा ‘बल्लू’, क्या फिर गूंजेगा — नायक नहीं, खलनायक हूँ मैं?

90 के दशक का आइकॉनिक खलनायक अब नए अंदाज़ में लौटने को तैयार सिनेमा की दुनिया में कुछ फिल्में सिर्फ फिल्म नहीं होतीं, वे एक दौर बन जाती हैं। Khalnayak ऐसी ही एक फिल्म थी, जिसने 90 के दशक में हिंदी सिनेमा को नया अंदाज़ दिया। जब Sanjay Dutt ने बल्लू के किरदार में पर्दे पर कदम रखा, तो हीरो और विलेन की रेखा धुंधली हो गई। “नायक नहीं, खलनायक हूँ मैं…” सिर्फ गीत नहीं रहा, एक पहचान बन गया। अब खबर है कि Khalnayak Returns के जरिए यह आइकॉनिक कहानी नए दौर में लौट सकती है। और बस यहीं से दर्शकों के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई है। क्यों खास है ‘खलनायक रिटर्न्स’? आज जब बॉलीवुड में सीक्वल और फ्रेंचाइज़ी का दौर चल रहा है, Khalnayak Returns सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि एक विरासत की वापसी लगती है। 1993 में आई पहली फिल्म ने अपराध, राजनीति, प्रेम और एक्शन को जिस तरह मिलाया था, वह अपने समय से आगे था। बल्लू कोई साधारण विलेन नहीं था—वह बागी था, खतरनाक था, लेकिन कहीं न कहीं इंसानी भी था। क्या फिर लौटेगा बल्लू? सबसे बड़ा आकर्षण यही है—क्या Sanjay Dutt फिर बल्लू बनेंगे? अगर ऐसा होता है, तो यह सिर...

मुंबई की सड़कों पर रुकी कहानी: जब एक महिला का गुस्सा बन गया सिस्टम से सवाल

  वर्ली के ट्रैफिक जाम में फंसी एक माँ की बेचैनी ने VIP कल्चर और आम जनता के हक़ पर खड़ी कर दी बड़ी बहस मुंबई की सड़कों पर उस दिन सब कुछ सामान्य था—या कम से कम लोगों को ऐसा ही लग रहा था। सुबह की भागदौड़, हॉर्न की आवाज़ें, ऑफिस जाने की जल्दी और स्कूल से बच्चों को लेने की जिम्मेदारी… हर किसी की अपनी एक कहानी थी। उन्हीं कहानियों में एक कहानी उस महिला की भी थी, जो अपनी कार में बैठी घड़ी पर बार-बार नज़र डाल रही थी। उसका बेटा स्कूल में इंतज़ार कर रहा होगा—यह ख्याल उसके मन में बार-बार आ रहा था। उसने एक्सीलेरेटर पर हल्का दबाव दिया, लेकिन गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी। सामने गाड़ियों की लंबी कतार थी, और पीछे से लगातार हॉर्न बज रहे थे। पहले उसने सोचा—शायद कुछ देर की बात होगी। लेकिन कुछ देर धीरे-धीरे आधे घंटे में बदल गई। गर्मी बढ़ रही थी, धैर्य घट रहा था। उसने खिड़की से बाहर झांका—लोग परेशान थे, कोई फोन पर बात कर रहा था, कोई बाइक से निकलने की कोशिश कर रहा था। तभी उसे पता चला कि आगे सड़क पर एक रैली निकली है। भीड़, झंडे और नारे… और उसी भीड़ के बीच कहीं एक काफिला था, जिसमें मंत्री गिरीश महाजन भी ...

झूठी ख्वाहिश – एक प्यार, एक धोखा और लालच की सच्ची कहानी

इस दुनिया में हर कोई कुछ पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन अंत में सब कुछ खो देता है। शहर की रात अजीब होती है। दूर से देखो तो रोशनी, पास जाओ तो अंधेरा। उसी अंधेरे में आरुष खड़ा था, हाथ में एक पुरानी चिट्ठी लिए — जिसकी आखिरी लाइन थी, “अगर सच जानना है, तो मुझे ढूंढो… लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी — मीरा।” मीरा… वही लड़की जिसने कभी उसे सिखाया था कि प्यार सबसे बड़ी दौलत है। और वही लड़की एक दिन अचानक गायब हो गई थी। आरुष ने उस चिट्ठी को कई बार पढ़ा था, लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ और था — डर, बेचैनी और एक अजीब सा शक। क्योंकि शहर में पिछले कुछ महीनों से अजीब घटनाएँ हो रही थीं। लोग अचानक गायब हो जाते थे, कुछ लाशें मिलती थीं, और कुछ का तो कोई नामोनिशान भी नहीं मिलता था। सब कुछ जुड़ा हुआ लग रहा था… और अब मीरा भी उसी कहानी का हिस्सा बन चुकी थी। वो चिट्ठी उसे शहर के एक पुराने इलाके में ले आई, जहाँ इमारतें खामोश थीं और गलियाँ जैसे किसी राज को छुपाए बैठी थीं। अंदर जाते ही उसे एक हल्की सी बदबू महसूस हुई — जैसे सड़ते हुए सच की। एक दरवाजा आधा खुला था। उसने उसे धक्का दिया। अंदर जो था, वो किसी बुरे स...

मानव से महामानव: डॉ. अंबेडकर पर प्रेरणात्मक हिंदी कविता | केदार नाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

   मानव से महामानव (दोहावली हिंदी कविता) मानव से महामानव ध्रुव,                  कोटि कोटि बंदन ।  जाति अछूत के उद्धारक,                  भारत भूमि के चंदन ।।   युग युग में बिरले ही आते,                  आपके जैसे प्राण ।  शिक्षा की डिग्री भी नर्वस,                  जाति सवर्ण में त्राण ।।  संविधान के प्राण विधाता,                   ब्रह्म निकेतन चाँद । आप धरा पर यदि ना आते,                   न जाता मनुवाद ।।   खत्म न होती जाति प्रथा,                   व्यथा गुलामी टीस ।  खत्म ना होती बंधुवा श्रम,                   मार बदन पग शीश ।। नमन...

आज के सुविचार:संकोची

।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है  किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है।  जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा  केदारनाथ भारतीय  अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...

मजदूरों की सैलरी की लड़ाई: नोएडा का वो दिन जब सड़कों पर उतर आया गुस्सा

  उस सुबह, सूरज तो रोज की तरह ही उगा था, लेकिन नोएडा की सड़कों पर कुछ अलग था। वहां मशीनों की आवाज नहीं, बल्कि हजारों मजदूरों की आवाज गूंज रही थी।  13 अप्रैल 2026 की सुबह नोएडा की सड़कों पर सब कुछ सामान्य नहीं था।  फैक्ट्रियों की मशीनें चलने से पहले ही हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। शुरुआत में यह एक शांत प्रदर्शन था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसे आंदोलन में बदल गया जिसने पूरे शहर को हिला दिया। मजदूरों की भीड़ बढ़ती गई। देखते ही देखते यह संख्या हजारों से बढ़कर लगभग 40,000 तक पहुंच गई। उनकी मांग साफ थी — “हम काम पूरा करते हैं, लेकिन हमें उसका पूरा हक नहीं मिलता।” यह गुस्सा अचानक नहीं था। यह कई सालों से जमा हो रही परेशानी का नतीजा था। असली वजह: वेतन का फर्क और बढ़ती मुश्किलें नोएडा के मजदूरों के गुस्से के पीछे सबसे बड़ी वजह थी वेतन में असमानता। पास के हरियाणा (गुरुग्राम) में मजदूरों की सैलरी हाल ही में काफी बढ़ाई गई थी, जबकि नोएडा के मजदूरों की सैलरी उतनी नहीं बढ़ी। मजदूरों का कहना था: महंगाई लगातार बढ़ रही है काम के घंटे लंबे हैं ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं मिलता और सैलरी जरू...

Coal India Dividend की सच्चाई

एक छोटा निवेश, बड़ा बदलाव: Coal India Dividend की सच्चाई सुबह का समय था। चाय की दुकान पर बैठे रमेश जी अपने मोबाइल में कुछ देख रहे थे। अचानक उनकी आँखों में चमक आ गई। उन्होंने अपने दोस्त सुरेश से कहा, “अरे देखो, इस साल अच्छा डिविडेंड देने वाली है!” सुरेश ने हंसते हुए कहा, “ये डिविडेंड होता क्या है? हम जैसे आम लोगों के लिए इसका क्या फायदा?” यही सवाल आज लाखों लोगों के मन में है। और इसी सवाल का जवाब समझना बहुत जरूरी है। डिविडेंड क्या होता है? डिविडेंड यानी कंपनी का वह हिस्सा जो वह अपने निवेशकों (shareholders) को मुनाफे में से देती है। सरल भाषा में समझें तो अगर आपने किसी कंपनी के शेयर खरीदे हैं, तो कंपनी आपको अपने मुनाफे का हिस्सा देती है। जैसे कि , जो भारत की सबसे बड़ी कोयला कंपनी है, हर साल अपने निवेशकों को डिविडेंड देती है।  Coal India Dividend इतना चर्चा में क्यों? हाल ही में Coal India के FY26 डिविडेंड की खबर तेजी से ट्रेंड कर रही है। इसका कारण है: कंपनी का मजबूत मुनाफा  सरकार की हिस्सेदारी  निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति  Coal India अक्सर हाई डिविडेंड देने वाल...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

  आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली) आवा गमन वह सत्य है,                    जैसे सूरज चांद ।  जैसे धरती अंबर अग्नि,                    जैसे खुद की याद ।।  जैसे वर्षा शरद हेमंत,                    जैसे पवन गति होय ।  जैसे प्रतिबिंब संग अपने,                     जैसे प्राण तन पोय ।। आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,                    जीवन मरण विधान । आना जाना सत्य विधा है,                     न रथ न है विमान ।। मन इच्छा मन माया रोगी,                     माया में फंसा प्राण ।  दुख झंझावत झेल झेल,                      हो रहा तन ...

आज के सुविचार:विशाल और सुंदर संसार

यह विशाल और सुंदर संसार आपकी रचना नहीं, यह रचना अद्भुत और अलौकिक है । यह अदृश्य ब्रह्म शक्तियों की रचना का समर्पण है, इस रचना में आप जितना भी पर्यटन कर सकते हैं कर ले किंतु ज्ञात रहे  आपका प्रत्येक पर्यटन, आपका प्रत्येक अवलोकन सृष्टि के सृजन हार की एक उपहार भेट इच्छा है ।  आप अपनी मर्जी से इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते । आपको  वह रचनाकार आपको जितनी  दूर तक सृष्टि दिखाएगा आपको जितनी दूर तक सृष्टि में घुमायेगा, बस आप उतनी ही दूरी तक सृष्टि देख सकेंगे उतरी है दूरी तक सृष्टि घूम सकेंगे ।  अर्थात आप अपनी इच्छा से  कुछ भी नहीं कर सकते । क्योंकि यदि अपनी ही इच्छा से सारे कार्य होते तो  यहां न कोई गरीब होता और न हीं कोई अमीर होता । वृक्ष भी अपने पत्ते अपनी इच्छा से कभी भी बड़े आराम से हिला डुला सकता था जिससे कि उसके पत्ते,उससे अलग होकर कहीं जमीन पर न टूट कर गिर पड़े ।          केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय) 📖 और भी सुविचार पढ़ें

चमत्कार: जीवन की सच्चाई बताती दोहावली कविता | केदारनाथ भारतीय

   चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित,                   जैसे    वायु    समान । क्षन में होनी  अनहोनी  हो,                   जाने विधिक विधान ।। कर   दे  पल  में  राई  पर्वत,                   पर्वत   को  करें  राइ । जलती किरणे रवि की बौनी,                   मेघ  जलधि  बरसाइ ।। अचरज   मृतक   देंह   चिता,                   शव  में उपजे   प्राण । अचरज भूजी मछली जल में,                    कूदे    पाकर     प्राण ।। चमत्कार   के   आश्चर्य   ऐसे,                  ...

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

मेरा जीवन कोरा कागज – तेरा मेरा जीवन (एक कविता) | केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

शब्द कम हैं, एहसास ज्यादा हैं… मेरा जीवन—कविता (दोहावली) यह कविता जीवन की सादगी, सच्चाई और पारदर्शिता को दर्शाती है। इसे दोहा शैली में भी पढ़ा जा सकता है, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई और अधिक प्रभावशाली हो जाती है।  इस रचना के माध्यम से लेखक शायद यह बताना चाहते हैं कि एक सच्चा जीवन वही है, जो बिना किसी छल, दिखावे और बनावट के जिया जाए—ठीक एक खुले पन्ने या कोरे कागज की तरह, जिसमें हर भाव स्पष्ट और निष्कपट हो।  तेरा, मेरा जीवन—एक कविता  (दोहावली) मेरा  जीवन  कोरा  कागज,                 स्वच्छ सरोज निकुंज ।  खुली  किताबों जैसी  ज्ञानें,                  स्वतंत्र सुभाषित पुंज ।।  पढ़ लीजै  यह जीवन भंगुर,                  जीवन  आपके  साथ ।  साथ बिछुड़ना कब हो जाये,                  जानें  जग   के   नाथ   ।।  यज्ञ...

ईरान vs अमेरिका: क्या दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है 2026?

  हर दिन बदलते हालात दुनिया को एक नए संकट की ओर ले जा रहे हैं। विश्व शांति के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौती  आज की दुनिया में जब हर देश शांति और विकास की बात करता है, उसी समय मध्य-पूर्व की जमीन पर एक ऐसा तनाव खड़ा हो गया है जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह टकराव अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रहा, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर साफ दिखाई दे रहा है। खबरें लगातार आ रही हैं, हालात तेजी से बदल रहे हैं और हर दिन कुछ नया हो रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में स्थिति अचानक से बहुत ज्यादा बिगड़ गई है। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर लगातार हवाई हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की ताकत को कमजोर करना बताया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे नहीं हटा और उसने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। कई जगहों पर धमाकों की आवाजें और धुएं के गुबार आम हो गए हैं। आम नागरिकों के बीच डर का माहौल बन चुका है, और लोग अपने घरों में सुरक्षित रहने की कोशिश कर रहे हैं। यह लड़ाई अब सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रही। आधुनिक तकनीक ने इसे और ख...

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विचित्र दुनिया–भाग 3|समय के जाल में राघव (हिंदी उपन्यास)

राघव इससे पहले कि कुछ समझ पाता, वह गिद्घ के चंगुल मे फस गया....  यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसके हर शब्द में एक सच्चाई की झलक छुपी है आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।
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