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अप्रैल, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज की विशेष कहानी

शब्दों की ताकत: ओह, आह, दर्द और दुख के पीछे हमारे पुरखों की अनुभव|सुविचार

क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।।  ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे ।                                    केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,।  शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...

झूठी ख्वाहिश – एक प्यार, एक धोखा और लालच की सच्ची कहानी

इस दुनिया में हर कोई कुछ पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन अंत में सब कुछ खो देता है। शहर की रात अजीब होती है। दूर से देखो तो रोशनी, पास जाओ तो अंधेरा। उसी अंधेरे में आरुष खड़ा था, हाथ में एक पुरानी चिट्ठी लिए — जिसकी आखिरी लाइन थी, “अगर सच जानना है, तो मुझे ढूंढो… लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी — मीरा।” मीरा… वही लड़की जिसने कभी उसे सिखाया था कि प्यार सबसे बड़ी दौलत है। और वही लड़की एक दिन अचानक गायब हो गई थी। आरुष ने उस चिट्ठी को कई बार पढ़ा था, लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ और था — डर, बेचैनी और एक अजीब सा शक। क्योंकि शहर में पिछले कुछ महीनों से अजीब घटनाएँ हो रही थीं। लोग अचानक गायब हो जाते थे, कुछ लाशें मिलती थीं, और कुछ का तो कोई नामोनिशान भी नहीं मिलता था। सब कुछ जुड़ा हुआ लग रहा था… और अब मीरा भी उसी कहानी का हिस्सा बन चुकी थी। वो चिट्ठी उसे शहर के एक पुराने इलाके में ले आई, जहाँ इमारतें खामोश थीं और गलियाँ जैसे किसी राज को छुपाए बैठी थीं। अंदर जाते ही उसे एक हल्की सी बदबू महसूस हुई — जैसे सड़ते हुए सच की। एक दरवाजा आधा खुला था। उसने उसे धक्का दिया। अंदर जो था, वो किसी बुरे स...

मानव से महामानव: डॉ. अंबेडकर पर प्रेरणात्मक हिंदी कविता | केदार नाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

   मानव से महामानव (दोहावली हिंदी कविता) मानव से महामानव ध्रुव,                  कोटि कोटि बंदन ।  जाति अछूत के उद्धारक,                  भारत भूमि के चंदन ।।   युग युग में बिरले ही आते,                  आपके जैसे प्राण ।  शिक्षा की डिग्री भी नर्वस,                  जाति सवर्ण में त्राण ।।  संविधान के प्राण विधाता,                   ब्रह्म निकेतन चाँद । आप धरा पर यदि ना आते,                   न जाता मनुवाद ।।   खत्म न होती जाति प्रथा,                   व्यथा गुलामी टीस ।  खत्म ना होती बंधुवा श्रम,                   मार बदन पग शीश ।। नमन...

आज के सुविचार:संकोची

।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है  किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है।  जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा  केदारनाथ भारतीय  अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

  आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली) आवा गमन वह सत्य है,                    जैसे सूरज चांद ।  जैसे धरती अंबर अग्नि,                    जैसे खुद की याद ।।  जैसे वर्षा शरद हेमंत,                    जैसे पवन गति होय ।  जैसे प्रतिबिंब संग अपने,                     जैसे प्राण तन पोय ।। आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,                    जीवन मरण विधान । आना जाना सत्य विधा है,                     न रथ न है विमान ।। मन इच्छा मन माया रोगी,                     माया में फंसा प्राण ।  दुख झंझावत झेल झेल,                      हो रहा तन ...

आज के सुविचार:विशाल और सुंदर संसार

यह विशाल और सुंदर संसार आपकी रचना नहीं, यह रचना अद्भुत और अलौकिक है । यह अदृश्य ब्रह्म शक्तियों की रचना का समर्पण है, इस रचना में आप जितना भी पर्यटन कर सकते हैं कर ले किंतु ज्ञात रहे  आपका प्रत्येक पर्यटन, आपका प्रत्येक अवलोकन सृष्टि के सृजन हार की एक उपहार भेट इच्छा है ।  आप अपनी मर्जी से इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते । आपको  वह रचनाकार आपको जितनी  दूर तक सृष्टि दिखाएगा आपको जितनी दूर तक सृष्टि में घुमायेगा, बस आप उतनी ही दूरी तक सृष्टि देख सकेंगे उतरी है दूरी तक सृष्टि घूम सकेंगे ।  अर्थात आप अपनी इच्छा से  कुछ भी नहीं कर सकते । क्योंकि यदि अपनी ही इच्छा से सारे कार्य होते तो  यहां न कोई गरीब होता और न हीं कोई अमीर होता । वृक्ष भी अपने पत्ते अपनी इच्छा से कभी भी बड़े आराम से हिला डुला सकता था जिससे कि उसके पत्ते,उससे अलग होकर कहीं जमीन पर न टूट कर गिर पड़े ।          केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय) 📖 और भी सुविचार पढ़ें

चमत्कार: जीवन की सच्चाई बताती दोहावली कविता | केदारनाथ भारतीय

   चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित,                   जैसे    वायु    समान । क्षन में होनी  अनहोनी  हो,                   जाने विधिक विधान ।। कर   दे  पल  में  राई  पर्वत,                   पर्वत   को  करें  राइ । जलती किरणे रवि की बौनी,                   मेघ  जलधि  बरसाइ ।। अचरज   मृतक   देंह   चिता,                   शव  में उपजे   प्राण । अचरज भूजी मछली जल में,                    कूदे    पाकर     प्राण ।। चमत्कार   के   आश्चर्य   ऐसे,                  ...

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

मेरा जीवन कोरा कागज – तेरा मेरा जीवन (एक कविता) | केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

शब्द कम हैं, एहसास ज्यादा हैं… मेरा जीवन—कविता (दोहावली) यह कविता जीवन की सादगी, सच्चाई और पारदर्शिता को दर्शाती है। इसे दोहा शैली में भी पढ़ा जा सकता है, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई और अधिक प्रभावशाली हो जाती है।  इस रचना के माध्यम से लेखक शायद यह बताना चाहते हैं कि एक सच्चा जीवन वही है, जो बिना किसी छल, दिखावे और बनावट के जिया जाए—ठीक एक खुले पन्ने या कोरे कागज की तरह, जिसमें हर भाव स्पष्ट और निष्कपट हो।  तेरा, मेरा जीवन—एक कविता  (दोहावली) मेरा  जीवन  कोरा  कागज,                 स्वच्छ सरोज निकुंज ।  खुली  किताबों जैसी  ज्ञानें,                  स्वतंत्र सुभाषित पुंज ।।  पढ़ लीजै  यह जीवन भंगुर,                  जीवन  आपके  साथ ।  साथ बिछुड़ना कब हो जाये,                  जानें  जग   के   नाथ   ।।  यज्ञ...

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"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
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