क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।। ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे । केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,। शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...
।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है। जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा केदारनाथ भारतीय अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...