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आज की विशेष कहानी

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

  आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली) आवा गमन वह सत्य है,                    जैसे सूरज चांद ।  जैसे धरती अंबर अग्नि,                    जैसे खुद की याद ।।  जैसे वर्षा शरद हेमंत,                    जैसे पवन गति होय ।  जैसे प्रतिबिंब संग अपने,                     जैसे प्राण तन पोय ।। आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,                    जीवन मरण विधान । आना जाना सत्य विधा है,                     न रथ न है विमान ।। मन इच्छा मन माया रोगी,                     माया में फंसा प्राण ।  दुख झंझावत झेल झेल,                      हो रहा तन ...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

 

ना कुछ लाया ना कुछ पाया आवागमन पर हिंदी कविता केदारनाथ भारतीय

आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली)

आवा गमन वह सत्य है, 
                  जैसे सूरज चांद । 
जैसे धरती अंबर अग्नि, 
                  जैसे खुद की याद ।। 

जैसे वर्षा शरद हेमंत, 
                  जैसे पवन गति होय । 
जैसे प्रतिबिंब संग अपने, 
                   जैसे प्राण तन पोय ।।

आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,
                   जीवन मरण विधान ।
आना जाना सत्य विधा है, 
                   न रथ न है विमान ।।

मन इच्छा मन माया रोगी, 
                   माया में फंसा प्राण । 
दुख झंझावत झेल झेल, 
                    हो रहा तन निष्प्रांण ।। 

व्यर्थ की चिंता व्यर्थ की दौड़े, 
                    व्यर्थ का है मेरा मेरा । 
ना कुछ लाया ना कुछ पाया, 
                    जो पाया न तेरा ।।

सुंदर जग सुंदर नभ मंडल, 
                    सुंदर मातु पिता । 
सुंदर गृह पाया बिन श्रम के, 
                    सुंदर प्रकृति कथा ।। 

आवा गमन पे भृकुटी क्यों, 
                      तन जाती है मीत । 
इससे संतुलित पृथ्वी होती,
                      प्रकृति बनती तीर्थ ।। 

                    केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)



 केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

ना कुछ लाया, ना कुछ पाया — यही जीवन का सच्चा संदेश है।
"मेरा-तेरा" के भ्रम से बाहर निकलकर, प्रेम और सादगी से जीवन जीएं।
यही इस कविता का सार और दुनिया के लिए एक छोटी सी सीख है।


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 केदार की कलम प्रस्तुति — नागेन्द्र बहादुर

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