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आज की विशेष कहानी

2026 Tata Tiago Facelift लॉन्च: 360° कैमरा, नया लुक और दमदार फीचर्स के साथ बड़ी एंट्री

पहली नजर में कैसी लगी नई टाटा टियागो फेसलिफ्ट? भारतीय बाजार में टाटा टियागो पहले से ही एक लोकप्रिय हैचबैक रही है। लेकिन 2026 फेसबुक देखने पर मुझे लगा कि टाटा मोटर्स ने सिर्फ डिजाइन ही बदलाव नहीं किया है, बल्कि वियतनाम की विलासीता पर भी ध्यान दिया है। कम बजट, बेहतर दमदार और आसान ड्राइविंग अनुभव के कारण यह श्रेणी लगातार लोकप्रिय बनी हुई है। इसी बीच टाटा मोटर्स ने अपना लोकप्रिय हैचबैक टियागो का नया अवतार 2026 टाटा टियागो फेसलिफ्ट लॉन्च किया है। कंपनी ने इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत ₹4.69 लाख रखी है। नई टियागो में केवल एक सामान्य अपडेट नहीं है, बल्कि इसके डिजाइन, फीचर्स, फीचर्स और तकनीक में कई बदलाव किए गए हैं। आयो विवरण से पता चलता है कि नए टाटा टियागो फ़ेसबुक में क्या खामियां हैं और यह आपके लिए सही विकल्प साबित हो सकता है। नया और आकर्षक एक्सटेरियर डिज़ाइन 2026 टाटा टियागो फेसलिफ्ट का सबसे बड़ा बदलाव नया डिज़ाइन है। पहली नज़र में यह सबसे आधुनिक और प्रीमियम पोस्टो में से एक है। फ्रंट में अब न्यू मार्केट हेडलाइट्स और कार ड्राइवर दिए गए हैं, जो कार को शार्प और आकर्षक लुक देते हैं। पुराने मॉड...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

 

ना कुछ लाया ना कुछ पाया आवागमन पर हिंदी कविता केदारनाथ भारतीय

आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली)

आवा गमन वह सत्य है, 
                  जैसे सूरज चांद । 
जैसे धरती अंबर अग्नि, 
                  जैसे खुद की याद ।। 

जैसे वर्षा शरद हेमंत, 
                  जैसे पवन गति होय । 
जैसे प्रतिबिंब संग अपने, 
                   जैसे प्राण तन पोय ।।

आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,
                   जीवन मरण विधान ।
आना जाना सत्य विधा है, 
                   न रथ न है विमान ।।

मन इच्छा मन माया रोगी, 
                   माया में फंसा प्राण । 
दुख झंझावत झेल झेल, 
                    हो रहा तन निष्प्रांण ।। 

व्यर्थ की चिंता व्यर्थ की दौड़े, 
                    व्यर्थ का है मेरा मेरा । 
ना कुछ लाया ना कुछ पाया, 
                    जो पाया न तेरा ।।

सुंदर जग सुंदर नभ मंडल, 
                    सुंदर मातु पिता । 
सुंदर गृह पाया बिन श्रम के, 
                    सुंदर प्रकृति कथा ।। 

आवा गमन पे भृकुटी क्यों, 
                      तन जाती है मीत । 
इससे संतुलित पृथ्वी होती,
                      प्रकृति बनती तीर्थ ।। 

                    केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)



 केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

ना कुछ लाया, ना कुछ पाया — यही जीवन का सच्चा संदेश है।
"मेरा-तेरा" के भ्रम से बाहर निकलकर, प्रेम और सादगी से जीवन जीएं।
यही इस कविता का सार और दुनिया के लिए एक छोटी सी सीख है।


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 केदार की कलम प्रस्तुति — नागेन्द्र बहादुर

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