लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी। डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष ।। प्रथम चरण ।। ...
।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है। जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा केदारनाथ भारतीय अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...