क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।। ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे । केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,। शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...
चमत्कार दोहावली—कविता
चमत्कार की वेग असीमित,जैसे वायु समान ।
क्षन में होनी अनहोनी हो,
जाने विधिक विधान ।।
कर दे पल में राई पर्वत,
पर्वत को करें राइ ।
जलती किरणे रवि की बौनी,
मेघ जलधि बरसाइ ।।
अचरज मृतक देंह चिता,
शव में उपजे प्राण ।
अचरज भूजी मछली जल में,
कूदे पाकर प्राण ।।
चमत्कार के आश्चर्य ऐसे,
चौके सकल समाज ।
उड़ि जाये पंछी छोड़ बसेरा,
बिना दिये आवाज ।।
चमत्कार में दुख सुख शामिल,
आश्चर्य से फटे नैन ।
चमत्कार में जन्म मरण का,
संगम छीने चैन ।।
चमत्कार उन्नति अवनति में,
करती है सदा वास ।
चमत्कार गति लोक विलोके,
आश्चर्य दे बहु खास ।।
केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
क्या सच में चमत्कार होता है, या यह सिर्फ हमारी सोच का खेल है?
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👇 क्या आपने अपने जीवन में कभी कोई चमत्कार महसूस किया है।
लेखक/कवि: केदारनाथ भारतीय
प्रस्तुति: नागेंद्र भारतीय
Kedar Ki Kalam
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“शब्दों की शक्ति से समाज को नई दिशा देने का प्रयास”

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