चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित, जैसे वायु समान । क्षन में होनी अनहोनी हो, जाने विधिक विधान ।। कर दे पल में राई पर्वत, पर्वत को करें राइ । जलती किरणे रवि की बौनी, मेघ जलधि बरसाइ । अचरज मृतक देंह चिता, शव में उपजे प्राण । अचरज भूजी मछली जल में, कूदे पाकर प्राण ।। चमत्कार के आश्चर्य ऐसे, ...
चमत्कार दोहावली—कविता
चमत्कार की वेग असीमित,जैसे वायु समान ।
क्षन में होनी अनहोनी हो,
जाने विधिक विधान ।।
कर दे पल में राई पर्वत,
पर्वत को करें राइ ।
जलती किरणे रवि की बौनी,
मेघ जलधि बरसाइ ।
अचरज मृतक देंह चिता,
शव में उपजे प्राण ।
अचरज भूजी मछली जल में,
कूदे पाकर प्राण ।।
चमत्कार के आश्चर्य ऐसे,
चौके सकल समाज ।
उड़ि जाये पंछी छोड़ बसेरा,
बिना दिये आवाज ।।
चमत्कार में दुख सुख शामिल,
आश्चर्य से फटे नैन ।
चमत्कार में जन्म मरण का,
संगम छीने चैन ।।
चमत्कार उन्नति अवनति में,
करती है सदा वास ।
चमत्कार गति लोक विलोके,
आश्चर्य दे बहु खास ।।
केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
क्या सच में चमत्कार होता है, या यह सिर्फ हमारी सोच का खेल है?
आप इस दोहावली को कैसे समझते हैं—अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर यह कविता दिल को छू गई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
👇 क्या आपने अपने जीवन में कभी कोई चमत्कार महसूस किया है।
लेखक/कवि: केदारनाथ भारतीय
प्रस्तुति: नागेंद्र भारतीय
Kedar Ki Kalam
🌐 www.kedarkahani.in
“शब्दों की शक्ति से समाज को नई दिशा देने का प्रयास”

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपनी राय साझा करें, लेकिन सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें।