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आज की विशेष कहानी

आज के सुविचार:संकोची

।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है  किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है।  जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा  केदारनाथ भारतीय  अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...
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मजदूरों की सैलरी की लड़ाई: नोएडा का वो दिन जब सड़कों पर उतर आया गुस्सा

  उस सुबह, सूरज तो रोज की तरह ही उगा था, लेकिन नोएडा की सड़कों पर कुछ अलग था। वहां मशीनों की आवाज नहीं, बल्कि हजारों मजदूरों की आवाज गूंज रही थी।  13 अप्रैल 2026 की सुबह नोएडा की सड़कों पर सब कुछ सामान्य नहीं था।  फैक्ट्रियों की मशीनें चलने से पहले ही हजारों मजदूर सड़कों पर उतर आए थे। शुरुआत में यह एक शांत प्रदर्शन था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक ऐसे आंदोलन में बदल गया जिसने पूरे शहर को हिला दिया। मजदूरों की भीड़ बढ़ती गई। देखते ही देखते यह संख्या हजारों से बढ़कर लगभग 40,000 तक पहुंच गई। उनकी मांग साफ थी — “हम काम पूरा करते हैं, लेकिन हमें उसका पूरा हक नहीं मिलता।” यह गुस्सा अचानक नहीं था। यह कई सालों से जमा हो रही परेशानी का नतीजा था। असली वजह: वेतन का फर्क और बढ़ती मुश्किलें नोएडा के मजदूरों के गुस्से के पीछे सबसे बड़ी वजह थी वेतन में असमानता। पास के हरियाणा (गुरुग्राम) में मजदूरों की सैलरी हाल ही में काफी बढ़ाई गई थी, जबकि नोएडा के मजदूरों की सैलरी उतनी नहीं बढ़ी। मजदूरों का कहना था: महंगाई लगातार बढ़ रही है काम के घंटे लंबे हैं ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं मिलता और सैलरी जरू...

Coal India Dividend की सच्चाई

एक छोटा निवेश, बड़ा बदलाव: Coal India Dividend की सच्चाई सुबह का समय था। चाय की दुकान पर बैठे रमेश जी अपने मोबाइल में कुछ देख रहे थे। अचानक उनकी आँखों में चमक आ गई। उन्होंने अपने दोस्त सुरेश से कहा, “अरे देखो, इस साल अच्छा डिविडेंड देने वाली है!” सुरेश ने हंसते हुए कहा, “ये डिविडेंड होता क्या है? हम जैसे आम लोगों के लिए इसका क्या फायदा?” यही सवाल आज लाखों लोगों के मन में है। और इसी सवाल का जवाब समझना बहुत जरूरी है। डिविडेंड क्या होता है? डिविडेंड यानी कंपनी का वह हिस्सा जो वह अपने निवेशकों (shareholders) को मुनाफे में से देती है। सरल भाषा में समझें तो अगर आपने किसी कंपनी के शेयर खरीदे हैं, तो कंपनी आपको अपने मुनाफे का हिस्सा देती है। जैसे कि , जो भारत की सबसे बड़ी कोयला कंपनी है, हर साल अपने निवेशकों को डिविडेंड देती है।  Coal India Dividend इतना चर्चा में क्यों? हाल ही में Coal India के FY26 डिविडेंड की खबर तेजी से ट्रेंड कर रही है। इसका कारण है: कंपनी का मजबूत मुनाफा  सरकार की हिस्सेदारी  निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति  Coal India अक्सर हाई डिविडेंड देने वाल...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

  आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली) आवा गमन वह सत्य है,                    जैसे सूरज चांद ।  जैसे धरती अंबर अग्नि,                    जैसे खुद की याद ।।  जैसे वर्षा शरद हेमंत,                    जैसे पवन गति होय ।  जैसे प्रतिबिंब संग अपने,                     जैसे प्राण तन पोय ।। आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,                    जीवन मरण विधान । आना जाना सत्य विधा है,                     न रथ न है विमान ।। मन इच्छा मन माया रोगी,                     माया में फंसा प्राण ।  दुख झंझावत झेल झेल,                      हो रहा तन ...

आज के सुविचार:विशाल और सुंदर संसार

यह विशाल और सुंदर संसार आपकी रचना नहीं, यह रचना अद्भुत और अलौकिक है । यह अदृश्य ब्रह्म शक्तियों की रचना का समर्पण है, इस रचना में आप जितना भी पर्यटन कर सकते हैं कर ले किंतु ज्ञात रहे  आपका प्रत्येक पर्यटन, आपका प्रत्येक अवलोकन सृष्टि के सृजन हार की एक उपहार भेट इच्छा है ।  आप अपनी मर्जी से इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते । आपको  वह रचनाकार आपको जितनी  दूर तक सृष्टि दिखाएगा आपको जितनी दूर तक सृष्टि में घुमायेगा, बस आप उतनी ही दूरी तक सृष्टि देख सकेंगे उतरी है दूरी तक सृष्टि घूम सकेंगे ।  अर्थात आप अपनी इच्छा से  कुछ भी नहीं कर सकते । क्योंकि यदि अपनी ही इच्छा से सारे कार्य होते तो  यहां न कोई गरीब होता और न हीं कोई अमीर होता । वृक्ष भी अपने पत्ते अपनी इच्छा से कभी भी बड़े आराम से हिला डुला सकता था जिससे कि उसके पत्ते,उससे अलग होकर कहीं जमीन पर न टूट कर गिर पड़े ।          केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय) 📖 और भी सुविचार पढ़ें

चमत्कार: जीवन की सच्चाई बताती दोहावली कविता | केदारनाथ भारतीय

   चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित,                   जैसे    वायु    समान । क्षन में होनी  अनहोनी  हो,                   जाने विधिक विधान ।। कर   दे  पल  में  राई  पर्वत,                   पर्वत   को  करें  राइ । जलती किरणे रवि की बौनी,                   मेघ  जलधि  बरसाइ ।। अचरज   मृतक   देंह   चिता,                   शव  में उपजे   प्राण । अचरज भूजी मछली जल में,                    कूदे    पाकर     प्राण ।। चमत्कार   के   आश्चर्य   ऐसे,                  ...

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

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विचित्र दुनिया–भाग 3|समय के जाल में राघव (हिंदी उपन्यास)

राघव इससे पहले कि कुछ समझ पाता, वह गिद्घ के चंगुल मे फस गया....  यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसके हर शब्द में एक सच्चाई की झलक छुपी है आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।
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