जब प्रेम निस्वार्थ होता है, तब ही जीवन में सच्ची शांति खिलती है.. ।। आज के सुविचार, जीवन मुक्ति ।। जीवन मुक्ति का भूलोक, सर्वश्रेष्ठ प्रेम योग है, जो निश्चल है, निस्वार्थ है, निष्कलंक है, पवित्र पुष्पों की भांति खिला खिला है । ऐसा पवित्र पयोधि तिहुँलोकों मैं दुर्लभ माना जाता हैं। केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय
हरि सोचो से काज बने, हरि बिन काज न होय —हिंदी कविता अमृतवाणी हिंदी कविता आपनु सोचा होवे न, हरि सोचा सब होय । हरि सोचो से काज बने, हरि बिन काज न होय ।। बृहद बड़ावन संपदा, अपना कह बौराय । अपना तो हरि से हरा, अपना कहां दिखाय ।। लाभे लाभ मन पिरोये, मन से माया टेर । मन में माया मिढ़ गया, झंझावत का ढेर ।। क्षन क्षन झूमे तरुवर पाती, नभ से बरसे मेघ । क्षन क्षन बदले सृष्टि दरपन, जिसमें हरि का भेष ।। समय से पहले प्रकृति प्यारी, कभी न ले विस्तार । समय से पहले आना-जाना, ...