यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।
विधि कानून बिचार अगारा ।।
राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।
नाम भीम विधि विद्या ढारे ।।
यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।
(लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
