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आज की विशेष कहानी

डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष – प्रथम चरण : वंदना

लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी।         डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष                  ।। प्रथम चरण ।।                   ...
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शब्दों की ताकत: ओह, आह, दर्द और दुख के पीछे हमारे पुरखों की अनुभव|सुविचार

क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।।  ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे ।                                    केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,।  शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...

Exam of the time|हर युवा की कहानी

Exam of the time  कड़ी मेहनत, अथक संघर्ष और वर्षों की पढ़ाई के बावजूद गौरव प्रसाद आज भी सफलता की उस सीढ़ी तक नहीं पहुँच पाए थे, जिसकी उम्मीद उन्होंने बचपन से संजो रखी थी। अब उनकी उम्र लगभग 35 वर्ष हो चुकी थी। समय ने उनके सिर के बाल कम कर दिए थे, लेकिन संघर्ष का बोझ अभी भी उनके कंधों पर वैसा ही था। बढ़ती उम्र, परिवार की जिम्मेदारियाँ और बेरोज़गारी ने उनके सपनों को धीरे-धीरे हकीकत की कठोर जमीन पर ला खड़ा किया था। कभी उन्होंने भी सोचा था कि अच्छी शिक्षा उन्हें एक सम्मानजनक नौकरी दिलाएगी। फिर अपना घर होगा, जीवनसाथी होगा, बच्चों की किलकारियाँ होंगी और एक सुकून भरी ज़िंदगी उनका इंतज़ार करेगी। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी। मेहनत उनकी थी, डिग्रियाँ उनकी थीं, सपने उनके थे—पर अवसर कहीं खो गए थे। जब व्यवस्था आम युवाओं की उम्मीदों से दूर हो जाए, तब सबसे अधिक कीमत उसी गरीब और मेहनतकश वर्ग को चुकानी पड़ती है, जिसके पास सपनों के अलावा कुछ नहीं होता। वर्ष 2040। सोमवार की रात  रेलवे स्टेशन पर कंधे पर बैग लटकाए खड़ा गौरव अपने जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर था। सामने अनिश्चित भविष्य था और मन में एक ...

कुमुद: संस्कार, ममता और मानवीय रिश्तों का सफर|हिंदी कहानी

कुमुद: संस्कार, दोस्ती और मानवता की अद्भुत गाथा लेखक: केदारनाथ भारतीय (उर्फ भुवाल भारतीय) मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, व्यवहार और प्रेम से होती है। कुछ लोग अपने जीवन में ऐसे आदर्श स्थापित कर लेते हैं कि उनका व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुमुद भी ऐसा ही छात्र था, मधुर स्वभाव, उच्च विचार और निष्कलंक चरित्र ने पूरे गांव को एक परिवार के सूत्र में बांध देता था। संस्कार, नैतिकता, त्याग और मानवता की कहानी — ' कुमुद ' कुमुद नाम का वह जवान और श्रेष्ठ लड़का,अपने अंतःउर में संस्कारों से परिपूर्ण सभ्यताओं का असीम सागर समेटे हुए था । उसके अधरों से सदा ही पवित्र मिलनसारिता और शिष्ट कुलीनता के अभय रस टपक रहे थे । उसकी मधुर मधुप रस बोलें,उसके  ऊचे ऊचे बिचार, संपूर्ण ग्रामीण जनों में माताओं बहनों तथा पुरुष प्रधान समाज को,एक अद्भुत प्रेम भाईचारे का आश्चर्य में तिरोहित हृदय स्पर्शी संदेश दे रहे थे  । वह कुमुद अपने अनुरागी बोल वचनों से जन जन को ऐसे बांध रखा था, जैसे कि वे लंबे लम्बे बांस,अपनी  जड़ों को आपस में एक दूसरों से...

जीवन और संघर्ष:आज का सुविचार — केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

मनुष्य जीवन में संघर्ष और समस्याएं, ऐसी दो कड़ियाँ हैं, जिनके साथ प्रत्येक प्राणी रहकर एक दिन इस संसार से अचानक ही अलविदा हो जाता है ।                              केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) प्रिय पाठकों ऐसे ही सुविचार और कविता, कहानी, मनोरंजन की खबरें , इत्यादि जानकारी के लिए हमारे इस साइट को subscribe करे, लेखक के हौसला बढ़ाने के लिए कमेंट जरूर करें।

आज का सुविचार: शब्द ही माया का सबसे बड़ा जाल हैं

।। आज का सुविचार ।। जैसे तिहुँलोकों का संपूर्ण ब्रह्मांड, प्रकृति की सुकोमल मदमाती लवकों से आच्छादित,नव श्रृंगारों से सुशोभित, प्राण प्राण को बांध रखी है, ठीक उसी भांति शब्दों और अक्षरों के संग संग माया भी महाजाल की भांति ब्रह्मांड के कण-कण को बांध रखी है ।  — केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) अगर आपको यह सुविचार पसंद आया हो, तो इसे शेयर करें और अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। ऐसे ही ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक विचारों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।  Kedar Ki Kalam 👉 शब्दों की शक्ति को समझने के लिए यहाँ क्लिक कपरें

झूठी ख्वाहिश – एक प्यार, एक धोखा और लालच की सच्ची कहानी

इस दुनिया में हर कोई कुछ पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन अंत में सब कुछ खो देता है। शहर की रात अजीब होती है। दूर से देखो तो रोशनी, पास जाओ तो अंधेरा। उसी अंधेरे में आरुष खड़ा था, हाथ में एक पुरानी चिट्ठी लिए — जिसकी आखिरी लाइन थी, “अगर सच जानना है, तो मुझे ढूंढो… लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी — मीरा।” मीरा… वही लड़की जिसने कभी उसे सिखाया था कि प्यार सबसे बड़ी दौलत है। और वही लड़की एक दिन अचानक गायब हो गई थी। आरुष ने उस चिट्ठी को कई बार पढ़ा था, लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ और था — डर, बेचैनी और एक अजीब सा शक। क्योंकि शहर में पिछले कुछ महीनों से अजीब घटनाएँ हो रही थीं। लोग अचानक गायब हो जाते थे, कुछ लाशें मिलती थीं, और कुछ का तो कोई नामोनिशान भी नहीं मिलता था। सब कुछ जुड़ा हुआ लग रहा था… और अब मीरा भी उसी कहानी का हिस्सा बन चुकी थी। वो चिट्ठी उसे शहर के एक पुराने इलाके में ले आई, जहाँ इमारतें खामोश थीं और गलियाँ जैसे किसी राज को छुपाए बैठी थीं। अंदर जाते ही उसे एक हल्की सी बदबू महसूस हुई — जैसे सड़ते हुए सच की। एक दरवाजा आधा खुला था। उसने उसे धक्का दिया। अंदर जो था, वो किसी बुरे स...

मानव से महामानव: डॉ. अंबेडकर पर प्रेरणात्मक हिंदी कविता | केदार नाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

   मानव से महामानव (दोहावली हिंदी कविता) मानव से महामानव ध्रुव,                  कोटि कोटि बंदन ।  जाति अछूत के उद्धारक,                  भारत भूमि के चंदन ।।   युग युग में बिरले ही आते,                  आपके जैसे प्राण ।  शिक्षा की डिग्री भी नर्वस,                  जाति सवर्ण में त्राण ।।  संविधान के प्राण विधाता,                   ब्रह्म निकेतन चाँद । आप धरा पर यदि ना आते,                   न जाता मनुवाद ।।   खत्म न होती जाति प्रथा,                   व्यथा गुलामी टीस ।  खत्म ना होती बंधुवा श्रम,                   मार बदन पग शीश ।। नमन...

आज के सुविचार:संकोची

।।आज के सुविचार— संकोची।। मनुष्य प्रायः अपने चिर परिचितों, कुटुंब कबीलो एवं आगंतुकों से, झुक झुक कर अभिवादन करता है। संस्कार शिष्टअचर एवं सभ्यता दिखाता है, संकोची स्वभाव होने के कारण वह कभी-कभी अपनी जिज्ञासा पूर्ण अंतरात्मा की बातें भी नहीं कह पाता है  किंतु वह अपने भगवान से अपने पारब्रह्म परमेश्वर से, अपने इष्ट विधाता से, लेस मात्रा भी संकोच नहीं करता, यहां तक की वह अपना अदब लिहाज और शिष्टाचार भुलाकर बड़े ही निडरता पूर्वक उनसे अपने हृदय की एक एक बात प्रार्थना बनाकर कह देता है।  जिसे ईश्वर मंद मंद मुस्कुराते हुए उसकी हर एक बात स्वीकार कर लेते हैं । हमारे ईश्वर कितने सुंदर हैं कितने अच्छे हैं और कितने ही समर्पित स्वभाव के हैं एवं कितने प्रिय है आप कमेंट में जरूर बताइएगा  केदारनाथ भारतीय  अगर आपको यह “आज का सुविचार – संकोची” पसंद आया हो ❤️ तो कृपया इसे शेयर करें, Comment 💬 में अपनी राय जरूर दें,और लेखक का हौसला बढ़ाए। ऐसे ही और प्रेरणादायक विचार पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग Kedar Ki Kalam को Follow करें। ?...

ना कुछ लाया ना कुछ पाया:आवागमन कविता |केदारनाथ भारतीय

  आवागमन का सच्चा सत्य कविता (दोहावली) आवा गमन वह सत्य है,                    जैसे सूरज चांद ।  जैसे धरती अंबर अग्नि,                    जैसे खुद की याद ।।  जैसे वर्षा शरद हेमंत,                    जैसे पवन गति होय ।  जैसे प्रतिबिंब संग अपने,                     जैसे प्राण तन पोय ।। आवागमन है पूर्ण ब्रह्म,                    जीवन मरण विधान । आना जाना सत्य विधा है,                     न रथ न है विमान ।। मन इच्छा मन माया रोगी,                     माया में फंसा प्राण ।  दुख झंझावत झेल झेल,                      हो रहा तन ...

आज के सुविचार:विशाल और सुंदर संसार

यह विशाल और सुंदर संसार आपकी रचना नहीं, यह रचना अद्भुत और अलौकिक है । यह अदृश्य ब्रह्म शक्तियों की रचना का समर्पण है, इस रचना में आप जितना भी पर्यटन कर सकते हैं कर ले किंतु ज्ञात रहे  आपका प्रत्येक पर्यटन, आपका प्रत्येक अवलोकन सृष्टि के सृजन हार की एक उपहार भेट इच्छा है ।  आप अपनी मर्जी से इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते । आपको  वह रचनाकार आपको जितनी  दूर तक सृष्टि दिखाएगा आपको जितनी दूर तक सृष्टि में घुमायेगा, बस आप उतनी ही दूरी तक सृष्टि देख सकेंगे उतरी है दूरी तक सृष्टि घूम सकेंगे ।  अर्थात आप अपनी इच्छा से  कुछ भी नहीं कर सकते । क्योंकि यदि अपनी ही इच्छा से सारे कार्य होते तो  यहां न कोई गरीब होता और न हीं कोई अमीर होता । वृक्ष भी अपने पत्ते अपनी इच्छा से कभी भी बड़े आराम से हिला डुला सकता था जिससे कि उसके पत्ते,उससे अलग होकर कहीं जमीन पर न टूट कर गिर पड़े ।          केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय) 📖 और भी सुविचार पढ़ें

चमत्कार: जीवन की सच्चाई बताती दोहावली कविता | केदारनाथ भारतीय

   चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित,                   जैसे    वायु    समान । क्षन में होनी  अनहोनी  हो,                   जाने विधिक विधान ।। कर   दे  पल  में  राई  पर्वत,                   पर्वत   को  करें  राइ । जलती किरणे रवि की बौनी,                   मेघ  जलधि  बरसाइ ।। अचरज   मृतक   देंह   चिता,                   शव  में उपजे   प्राण । अचरज भूजी मछली जल में,                    कूदे    पाकर     प्राण ।। चमत्कार   के   आश्चर्य   ऐसे,                  ...

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

मेरा जीवन कोरा कागज – तेरा मेरा जीवन (एक कविता) | केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

शब्द कम हैं, एहसास ज्यादा हैं… मेरा जीवन—कविता (दोहावली) यह कविता जीवन की सादगी, सच्चाई और पारदर्शिता को दर्शाती है। इसे दोहा शैली में भी पढ़ा जा सकता है, जिससे इसकी भावनात्मक गहराई और अधिक प्रभावशाली हो जाती है।  इस रचना के माध्यम से लेखक शायद यह बताना चाहते हैं कि एक सच्चा जीवन वही है, जो बिना किसी छल, दिखावे और बनावट के जिया जाए—ठीक एक खुले पन्ने या कोरे कागज की तरह, जिसमें हर भाव स्पष्ट और निष्कपट हो।  तेरा, मेरा जीवन—एक कविता  (दोहावली) मेरा  जीवन  कोरा  कागज,                 स्वच्छ सरोज निकुंज ।  खुली  किताबों जैसी  ज्ञानें,                  स्वतंत्र सुभाषित पुंज ।।  पढ़ लीजै  यह जीवन भंगुर,                  जीवन  आपके  साथ ।  साथ बिछुड़ना कब हो जाये,                  जानें  जग   के   नाथ   ।।  यज्ञ...

आज का सुविचार: सच्चे प्रेम की परिभाषा | केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

  जब प्रेम निस्वार्थ होता है, तब ही जीवन में सच्ची शांति खिलती है.. ।। आज के सुविचार, जीवन मुक्ति ।।  जीवन मुक्ति का भूलोक, सर्वश्रेष्ठ प्रेम योग है, जो निश्चल है, निस्वार्थ है, निष्कलंक है, पवित्र पुष्पों की भांति खिला खिला है । ऐसा पवित्र पयोधि तिहुँलोकों मैं दुर्लभ माना जाता हैं। केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय  

हरि बिन काज न होय – हरि सोचो से काज बने | हिंदी भक्ति कविता – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

  हरि सोचो से काज बने, हरि बिन काज न होय —हिंदी कविता अमृतवाणी हिंदी कविता आपनु सोचा होवे न,              हरि सोचा सब होय । हरि सोचो से काज बने,              हरि बिन काज न होय ।। बृहद बड़ावन संपदा,              अपना कह बौराय । अपना तो हरि से हरा,              अपना कहां दिखाय ।। लाभे लाभ मन पिरोये,             मन से माया टेर । मन में माया मिढ़ गया,              झंझावत का ढेर ।। क्षन क्षन झूमे तरुवर पाती,              नभ से बरसे मेघ । क्षन क्षन बदले सृष्टि दरपन,              जिसमें हरि का भेष ।। समय से पहले प्रकृति प्यारी,               कभी न ले विस्तार ।  समय से पहले आना-जाना,       ...

आज के सुविचार | मन की शक्ति पर प्रेरणादायक विचार | केदारनाथ भारतीय

  आज के सुविचार | मन की शक्ति ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है आज का सुविचार मन की शक्ति और मन के विचारों की महानता को बताता है।   मनुष्य के जीवन में मन का स्थान सबसे ऊँचा माना गया है, क्योंकि मन ही मनुष्य को सही और गलत का ज्ञान कराता है। इस संपूर्ण संसार में मन की गति, मन की शक्ति, मन का सौंदर्य, मन का मनन तथा मन के विचार सदैव ही सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं। इसके सामने तन की कोई विशेषता नहीं होती। यदि मन मजबूत हो तो मनुष्य हर कठिनाई को पार कर सकता है। मन की शक्ति ही मनुष्य की असली पहचान होती है।   लेखक – केदारनाथ भारतीय  उर्फ भुवाल भारतीय

दुख ही दुख की भाषा समझे कविता | केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय

कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे   लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय ।। दुख सुख ।।  कविता ।। दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा,                प्रेम की गंगा धारा है ।  निश्चल आत्म हितैषी वाणी,                मन का राज दुलारा है ।। सबको याद है करता निशदिन,                मधुर मधुप रस घोलो से । दुख ही दुख की भाषा समझे,                मिलन करें मधु बोलो से ।।  दुख को देखें सुख जब भैया,                दुख से सुख कुछ दूर हटे ।  हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए,                हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।।  सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी,                 दयाहीन पाषाण अधम ।  व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी,              ...

ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार

  ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार वह सृष्टि विनायक, वह ईश्वर, वह आदि और अनंता, एवं नभ वृंदारकों का श्रेष्ठ भूपति महानायक कितना महान है, कि वह हमें इतनी खूबसूरत सृष्टि में भेजने से पहले, हमारे लिए कितनी अच्छी-अच्छी व्यवस्थाएं पहले से ही बिना स्वार्थ समर्पित कर दिया था।

दोस्ती 3|राम मनोहर पंढरपुरी का सपना या हकीकत—केदार नाथ भारतीय की हिंदी कहानी

  क्या वह राजमहल सच था या टूटी हुई जिंदगी का एक सपना?  उसने बताया कि एक सप्ताह पहले यहां मेरी तीन बकरियां गुम हो गई थी, एक मिली और दो अभी नहीं मिल सकी है उन्हीं को ढूंढते–ढूंढते मैं यहां पहुंचा था, दूर से जब मैंने आपको देखा तो मुझे लगा कि शायद आप ही बकरियां चोर हैं आपके पास आया तो आप गहरी नींद में सो रहे थे, मैंने आपको उठाने का प्रयास किया तो आप उठे, किंतु आपने रामचंद्रन पंढरपुरी के विषय में जो कुछ भी हमें बताएं उसे सुनकर हमें भी गहरा सदमा पहुंचा है, हम भी भयभीत हो उठे हैं ।  यह कहानी केवल शब्दों का क्रम नहीं, बल्कि उन रिश्तों की गूंज है...आइए, इस दुर्गम पथ पर राम मनोहर के साथ चलें और दोस्ती के उस अर्थ को समझें जो हर मोड़ पर खुद को साबित करता है। लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)

घृणा — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में सब भाई-भाई | एक सामाजिक हिंदी कहानी

चपरासी बड़े अदब के साथ उसके पीछे-पीछे अंदर आया, चपरासी ने पूछा—साहब क्या बात है, आपने मुझे बुलाया ।  हां हमने बुलाया, क्या नाम है तुम्हारा, यहीं रहते हो, इधर आओ, ये लो खाली बोतल, सामने वाले नल से ताजा पानी ले आओ, वैसे तुम्हारा नाम चाहे जो कुछ भी हो किंतु हम तुम्हें रामु कह कर बुलाया करेंगे तुझे बुरा तो नहीं लगेगा ।  जब नफ़रत बोलती है, तब इंसानियत चुप हो जाती है — और जब इंसानियत बोलती है, तब पूरा हिंदुस्तान खड़ा हो जाता है।  (लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)

दोस्ती 2 |राम मनोहर का दुर्गम पथ ( हिंदी कहानी)

वैसे मेरा बेटा ही हरामखोर था जो पुलिस की नौकरी पाने के बाद भी मुझे गिफ्ट में ये कीपैड मोबाइल दे दिया है, क्या वह एंड्राइड मोबाइल नहीं दे सकता था,जिससे समाज में मेरी इज्जत और भी बढ़ जाती, किंतु वह ऐसा नहीं किया ।  पता नहीं कितने लोग मेरी इस छोटी सी मोबाइल को देखकर अपनी खीसें निपोरे होंगे,अपने मुंह को छिपा छिपा कर हसें होंगे, राम जाने मेरी उस समय उनके बीच में, कितनी फजीहत हुई होगी ।  यह कहानी केवल शब्दों का क्रम नहीं, बल्कि उन रिश्तों की गूंज है...आइए, इस दुर्गम पथ पर राम मनोहर के साथ चलें और दोस्ती के उस अर्थ को समझें जो हर मोड़ पर खुद को साबित करता है। लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज

कर्म और भाग्य|सीख देने वाली प्रेरणात्मक "हिंदी कहानी"

देखिए सर,मैं अपनी लाइफ में पहली बार रेलवे स्टेशन आया हूं यहां के किसी भी नियम से मैं परिचित नहीं हूं वैसे भी मैं पहली बार यहां आकर ट्रेन देखूंगा और उसमें यात्रा के लिए बैठूंगा, रही टिकट की बात तो मेरे पास इस समय मात्र ₹50 हैं । चितरंजन दास ने बगैर कुछ छुपाए हुए,वह सब कुछ बक दिया, जिसे लोग अक्सर छुपाया करते हैं। " कर्म और भाग्य " यह कहानी है चितरंजन दास की... एक ऐसा नौजवान, जिसने गरीबी से लड़ने का संकल्प लिया... "यह कहानी काल्पनिक है, लेकिन समाज की सच्चाइयों से प्रेरित। (लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)

लाडो बहन की विदाई पर भावुक—हिंदी गीत

लाडो बहन की विदाई से,            हम सबको उदासी है... लाडो बहन की विदाई हिंदी गीत हर उस दिल को छू जाती है जिसने कभी अपनी बहन को विदा होते देखा है। "केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय"  एक संवेदनशील लेखक और कवि हैं, जो रिश्तों, समाज और मानवीय भावनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास करते हैं। उनकी रचनाएँ कम शब्दों में गहरी अनुभूति छोड़ जाती हैं।

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया – भाग 7 |धूम्रा का रहस्य अभी बाकी है (हिंदी उपन्यास)

राघव एक फाइव-स्टार होटल की सुकूनभरी कुर्सी पर बैठा, हाथों में अख़बार थामे पन्ने पलट रहा था कि तभी उसे एक पंक्ति ने उसके भीतर सब कुछ हिला दिया— “अकोढापुर गांव भूकंप से पूरी तरह नष्ट…" लेकिन उसे क्या पता था कि यह यात्रा उसे उसके गांव तक नहीं, बल्कि नियति के किसी और ही भयावह मोड़ तक ले जाने वाली है। रास्ते में ऐसा कुछ घटा, जिसे न तर्क समझ सका, न समय। राघव कभी अकोढापुर पहुँच ही नहीं पाया। इसके बजाय वह पहुँच गया एक अनजानी, रहस्यमयी और भयावह दुनिया में—एक ऐसी विचित्र दुनिया, जहाँ आत्माएँ भटकती थीं, प्रेत छायाओं की तरह मंडराते थे और शैतानी शक्तियाँ शासन करती थीं।  यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है,आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से। चलिए, अब आगे बढ़ते हैं....

विचित्र दुनिया – भाग 6 | मोहनी मंत्र और ब्रह्मराक्षस का भयावह खेल (हिंदी उपन्यास)

देखते ही देखते वहाँ भयानक संघर्ष का माहौल बन गया। एक ब्रह्मराक्षस के स्थान पर सैकड़ों ब्रह्मराक्षस अपने-अपने रहस्यमयी रूपों में प्रकट होते दिखाई देने लगे। उनके बीच शक्तियों का ऐसा टकराव हो रहा था कि आकाश में चमकती रोशनियाँ फैल गईं। राघव और शशिकला यह सब देख-देख कर घबरा गए। यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है,आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

विचित्र दुनिया — भाग 5 | जब प्यार मौत माँगे (हिंदी उपन्यास)

तुम जानती हो यह कौन है? यह एक साधारण मानव है — हाड़–मांस का इंसान। और तुम… एक ऐसी शक्ति से जुड़ी हो, जिसकी दुनिया उससे बिल्कुल अलग है। यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है,आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

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"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
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