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मार्च, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज की विशेष कहानी

डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष – प्रथम चरण : वंदना

लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी।         डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष                  ।। प्रथम चरण ।।                   ...

आज का सुविचार: सच्चे प्रेम की परिभाषा | केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

  जब प्रेम निस्वार्थ होता है, तब ही जीवन में सच्ची शांति खिलती है.. ।। आज के सुविचार, जीवन मुक्ति ।।  जीवन मुक्ति का भूलोक, सर्वश्रेष्ठ प्रेम योग है, जो निश्चल है, निस्वार्थ है, निष्कलंक है, पवित्र पुष्पों की भांति खिला खिला है । ऐसा पवित्र पयोधि तिहुँलोकों मैं दुर्लभ माना जाता हैं। केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय  

हरि बिन काज न होय – हरि सोचो से काज बने | हिंदी भक्ति कविता – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

  हरि सोचो से काज बने, हरि बिन काज न होय —हिंदी कविता अमृतवाणी हिंदी कविता आपनु सोचा होवे न,              हरि सोचा सब होय । हरि सोचो से काज बने,              हरि बिन काज न होय ।। बृहद बड़ावन संपदा,              अपना कह बौराय । अपना तो हरि से हरा,              अपना कहां दिखाय ।। लाभे लाभ मन पिरोये,             मन से माया टेर । मन में माया मिढ़ गया,              झंझावत का ढेर ।। क्षन क्षन झूमे तरुवर पाती,              नभ से बरसे मेघ । क्षन क्षन बदले सृष्टि दरपन,              जिसमें हरि का भेष ।। समय से पहले प्रकृति प्यारी,               कभी न ले विस्तार ।  समय से पहले आना-जाना,       ...

आज के सुविचार | मन की शक्ति पर प्रेरणादायक विचार | केदारनाथ भारतीय

  आज के सुविचार | मन की शक्ति ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है आज का सुविचार मन की शक्ति और मन के विचारों की महानता को बताता है।   मनुष्य के जीवन में मन का स्थान सबसे ऊँचा माना गया है, क्योंकि मन ही मनुष्य को सही और गलत का ज्ञान कराता है। इस संपूर्ण संसार में मन की गति, मन की शक्ति, मन का सौंदर्य, मन का मनन तथा मन के विचार सदैव ही सर्वश्रेष्ठ कहलाते हैं। इसके सामने तन की कोई विशेषता नहीं होती। यदि मन मजबूत हो तो मनुष्य हर कठिनाई को पार कर सकता है। मन की शक्ति ही मनुष्य की असली पहचान होती है।   लेखक – केदारनाथ भारतीय  उर्फ भुवाल भारतीय

दुख ही दुख की भाषा समझे कविता | केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय

कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे   लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय ।। दुख सुख ।।  कविता ।। दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा,                प्रेम की गंगा धारा है ।  निश्चल आत्म हितैषी वाणी,                मन का राज दुलारा है ।। सबको याद है करता निशदिन,                मधुर मधुप रस घोलो से । दुख ही दुख की भाषा समझे,                मिलन करें मधु बोलो से ।।  दुख को देखें सुख जब भैया,                दुख से सुख कुछ दूर हटे ।  हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए,                हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।।  सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी,                 दयाहीन पाषाण अधम ।  व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी,              ...

ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार

  ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार वह सृष्टि विनायक, वह ईश्वर, वह आदि और अनंता, एवं नभ वृंदारकों का श्रेष्ठ भूपति महानायक कितना महान है, कि वह हमें इतनी खूबसूरत सृष्टि में भेजने से पहले, हमारे लिए कितनी अच्छी-अच्छी व्यवस्थाएं पहले से ही बिना स्वार्थ समर्पित कर दिया था।

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"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
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