कुमुद: संस्कार, दोस्ती और मानवता की अद्भुत गाथा लेखक: केदारनाथ भारतीय (उर्फ भुवाल भारतीय) मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, व्यवहार और प्रेम से होती है। कुछ लोग अपने जीवन में ऐसे आदर्श स्थापित कर लेते हैं कि उनका व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुमुद भी ऐसा ही छात्र था, मधुर स्वभाव, उच्च विचार और निष्कलंक चरित्र ने पूरे गांव को एक परिवार के सूत्र में बांध देता था। संस्कार, नैतिकता, त्याग और मानवता की कहानी — ' कुमुद ' कुमुद नाम का वह जवान और श्रेष्ठ लड़का,अपने अंतःउर में संस्कारों से परिपूर्ण सभ्यताओं का असीम सागर समेटे हुए था । उसके अधरों से सदा ही पवित्र मिलनसारिता और शिष्ट कुलीनता के अभय रस टपक रहे थे । उसकी मधुर मधुप रस बोलें,उसके ऊचे ऊचे बिचार, संपूर्ण ग्रामीण जनों में माताओं बहनों तथा पुरुष प्रधान समाज को,एक अद्भुत प्रेम भाईचारे का आश्चर्य में तिरोहित हृदय स्पर्शी संदेश दे रहे थे । वह कुमुद अपने अनुरागी बोल वचनों से जन जन को ऐसे बांध रखा था, जैसे कि वे लंबे लम्बे बांस,अपनी जड़ों को आपस में एक दूसरों से...
जब प्रेम निस्वार्थ होता है, तब ही जीवन में सच्ची शांति खिलती है.. ।। आज के सुविचार, जीवन मुक्ति ।। जीवन मुक्ति का भूलोक, सर्वश्रेष्ठ प्रेम योग है, जो निश्चल है, निस्वार्थ है, निष्कलंक है, पवित्र पुष्पों की भांति खिला खिला है । ऐसा पवित्र पयोधि तिहुँलोकों मैं दुर्लभ माना जाता हैं। केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय