चमत्कार दोहावली—कविता चमत्कार की वेग असीमित, जैसे वायु समान । क्षन में होनी अनहोनी हो, जाने विधिक विधान ।। कर दे पल में राई पर्वत, पर्वत को करें राइ । जलती किरणे रवि की बौनी, मेघ जलधि बरसाइ । अचरज मृतक देंह चिता, शव में उपजे प्राण । अचरज भूजी मछली जल में, कूदे पाकर प्राण ।। चमत्कार के आश्चर्य ऐसे, ...
Welcome to Kedar Ki Kalam By Nagendra Bharatiy – हिंदी कहानियाँ और सामाजिक विचार
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