लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी। डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष ।। प्रथम चरण ।। ...
इस दुनिया में हर कोई कुछ पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन अंत में सब कुछ खो देता है। शहर की रात अजीब होती है। दूर से देखो तो रोशनी, पास जाओ तो अंधेरा। उसी अंधेरे में आरुष खड़ा था, हाथ में एक पुरानी चिट्ठी लिए — जिसकी आखिरी लाइन थी, “अगर सच जानना है, तो मुझे ढूंढो… लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी होगी — मीरा।” मीरा… वही लड़की जिसने कभी उसे सिखाया था कि प्यार सबसे बड़ी दौलत है। और वही लड़की एक दिन अचानक गायब हो गई थी। आरुष ने उस चिट्ठी को कई बार पढ़ा था, लेकिन आज उसकी आँखों में कुछ और था — डर, बेचैनी और एक अजीब सा शक। क्योंकि शहर में पिछले कुछ महीनों से अजीब घटनाएँ हो रही थीं। लोग अचानक गायब हो जाते थे, कुछ लाशें मिलती थीं, और कुछ का तो कोई नामोनिशान भी नहीं मिलता था। सब कुछ जुड़ा हुआ लग रहा था… और अब मीरा भी उसी कहानी का हिस्सा बन चुकी थी। वो चिट्ठी उसे शहर के एक पुराने इलाके में ले आई, जहाँ इमारतें खामोश थीं और गलियाँ जैसे किसी राज को छुपाए बैठी थीं। अंदर जाते ही उसे एक हल्की सी बदबू महसूस हुई — जैसे सड़ते हुए सच की। एक दरवाजा आधा खुला था। उसने उसे धक्का दिया। अंदर जो था, वो किसी बुरे स...