सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आज की विशेष कहानी

डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष – प्रथम चरण : वंदना

लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी।         डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष                  ।। प्रथम चरण ।।                   ...

कुमुद: संस्कार, ममता और मानवीय रिश्तों का सफर|हिंदी कहानी

कुमुद: संस्कार, दोस्ती और मानवता की अद्भुत गाथा लेखक: केदारनाथ भारतीय (उर्फ भुवाल भारतीय) मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, व्यवहार और प्रेम से होती है। कुछ लोग अपने जीवन में ऐसे आदर्श स्थापित कर लेते हैं कि उनका व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुमुद भी ऐसा ही छात्र था, मधुर स्वभाव, उच्च विचार और निष्कलंक चरित्र ने पूरे गांव को एक परिवार के सूत्र में बांध देता था। संस्कार, नैतिकता, त्याग और मानवता की कहानी — ' कुमुद ' कुमुद नाम का वह जवान और श्रेष्ठ लड़का,अपने अंतःउर में संस्कारों से परिपूर्ण सभ्यताओं का असीम सागर समेटे हुए था । उसके अधरों से सदा ही पवित्र मिलनसारिता और शिष्ट कुलीनता के अभय रस टपक रहे थे । उसकी मधुर मधुप रस बोलें,उसके  ऊचे ऊचे बिचार, संपूर्ण ग्रामीण जनों में माताओं बहनों तथा पुरुष प्रधान समाज को,एक अद्भुत प्रेम भाईचारे का आश्चर्य में तिरोहित हृदय स्पर्शी संदेश दे रहे थे  । वह कुमुद अपने अनुरागी बोल वचनों से जन जन को ऐसे बांध रखा था, जैसे कि वे लंबे लम्बे बांस,अपनी  जड़ों को आपस में एक दूसरों से...

जीवन और संघर्ष:आज का सुविचार — केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

मनुष्य जीवन में संघर्ष और समस्याएं, ऐसी दो कड़ियाँ हैं, जिनके साथ प्रत्येक प्राणी रहकर एक दिन इस संसार से अचानक ही अलविदा हो जाता है ।                              केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) प्रिय पाठकों ऐसे ही सुविचार और कविता, कहानी, मनोरंजन की खबरें , इत्यादि जानकारी के लिए हमारे इस साइट को subscribe करे, लेखक के हौसला बढ़ाने के लिए कमेंट जरूर करें।

आज का सुविचार: शब्द ही माया का सबसे बड़ा जाल हैं

।। आज का सुविचार ।। जैसे तिहुँलोकों का संपूर्ण ब्रह्मांड, प्रकृति की सुकोमल मदमाती लवकों से आच्छादित,नव श्रृंगारों से सुशोभित, प्राण प्राण को बांध रखी है, ठीक उसी भांति शब्दों और अक्षरों के संग संग माया भी महाजाल की भांति ब्रह्मांड के कण-कण को बांध रखी है ।  — केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) अगर आपको यह सुविचार पसंद आया हो, तो इसे शेयर करें और अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। ऐसे ही ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक विचारों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।  Kedar Ki Kalam 👉 शब्दों की शक्ति को समझने के लिए यहाँ क्लिक कपरें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
Home | About Us | Contact | Privacy | Disclaimer | Terms and conditions| Sitemap
© 2025–2026 kedarkahani.in | All Rights Reserved by Nagendra Bahadur Bharatiya