क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।। ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे । केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,। शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...
जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में शैशव काल बिता,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में शैशव काल बिता,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में मां का दूध पिया,
वह दृश्य न आये दोबारा ।
जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,
वह दृश्य न आये दोबारा ।।
जिस दृश्य में बचपन बीत गया,
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में हो गये दादा दादी,
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में अर्थी सेज बने,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में मरघट चिता सजे,
वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में काया धूं धूं, जले,
वह दृश्य न आए दोबारा ।।
केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय)
लेखक परिचय:
केदारनाथ भारतीय, जिन्हें भुवाल भारतीय के नाम से भी जाना जाता है, (मसाढी) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत से संबंधित हैं। हिंदी साहित्य के उन रचनाकारों में से हैं जो अपनी सरल, सच्ची और दिल को छू लेने वाली लेखनी के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में जीवन के अनुभव, समाज की वास्तविकता और मानवीय भावनाओं की गहराई साफ झलकती है।
उनकी कविताएँ केवल शब्दों का समूह नहीं होतीं, बल्कि वे पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली अनुभूतियाँ होती हैं। चाहे वह प्रेम हो, जीवन का संघर्ष हो या समाज का कोई पहलू — केदारनाथ भारतीय अपनी लेखनी से हर विषय को सहज और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
विशेष रूप से उनकी दोहावली शैली में लिखी गई कविताएँ पारंपरिक हिंदी साहित्य की झलक देती हैं, जिसमें कम शब्दों में गहरी बात कहने की अद्भुत क्षमता होती है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ हर आयु वर्ग के पाठकों को आकर्षित करती हैं।
आज के डिजिटल युग में भी, केदारनाथ भारतीय की लेखनी यह साबित करती है कि सच्ची भावनाएँ और सरल भाषा हमेशा लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं।
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