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आज की विशेष कहानी

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

 
जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया कविता, केदारनाथ भारतीय दोहावली हिंदी कविता


जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,
              वह दृश्य न आए दोबारा । 
जिस दृश्य में शैशव काल बिता, 
              वह दृश्य न आए दोबारा ।। 
 जिस दृश्य में मां का दूध पिया, 
              वह दृश्य न आये दोबारा ।
जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,
              वह दृश्य न आये दोबारा ।।
जिस दृश्य में बचपन बीत गया, 
              वह दृश्य न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा, 
              वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,
              वह दृश्य  न आए दोबारा ।
जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,
              वह दृश्य न आए दोबारा ।। 
जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी, 
              वह  दृश्य न आए दोबारा ।
 जिस  दृश्य   में  अर्थी  सेज  बने, 
              वह दृश्य न आए दोबारा ।।
जिस दृश्य में  मरघट  चिता  सजे, 
              वह दृश्य न  आए दोबारा । 
जिस  दृश्य  में काया  धूं  धूं, जले, 
              वह दृश्य न आए दोबारा ।।

                  केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय)

लेखक परिचय: 
केदारनाथ भारतीय, जिन्हें भुवाल भारतीय के नाम से भी जाना जाता है, (मसाढी) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, भारत से संबंधित हैं। हिंदी साहित्य के उन रचनाकारों में से हैं जो अपनी सरल, सच्ची और दिल को छू लेने वाली लेखनी के लिए पहचाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में जीवन के अनुभव, समाज की वास्तविकता और मानवीय भावनाओं की गहराई साफ झलकती है।

उनकी कविताएँ केवल शब्दों का समूह नहीं होतीं, बल्कि वे पाठकों के दिल तक पहुँचने वाली अनुभूतियाँ होती हैं। चाहे वह प्रेम हो, जीवन का संघर्ष हो या समाज का कोई पहलू — केदारनाथ भारतीय अपनी लेखनी से हर विषय को सहज और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करते हैं।

विशेष रूप से उनकी दोहावली शैली में लिखी गई कविताएँ पारंपरिक हिंदी साहित्य की झलक देती हैं, जिसमें कम शब्दों में गहरी बात कहने की अद्भुत क्षमता होती है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ हर आयु वर्ग के पाठकों को आकर्षित करती हैं।
आज के डिजिटल युग में भी, केदारनाथ भारतीय की लेखनी यह साबित करती है कि सच्ची भावनाएँ और सरल भाषा हमेशा लोगों के दिलों में अपनी जगह बना लेती हैं।

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प्रस्तुति: नागेन्द्र बहादुर | केदार की कलम 

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