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आज की विशेष कहानी

शब्दों की ताकत: ओह, आह, दर्द और दुख के पीछे हमारे पुरखों की अनुभव|सुविचार

क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।।  ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे ।                                    केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,।  शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...

हरि बिन काज न होय – हरि सोचो से काज बने | हिंदी भक्ति कविता – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

 

हरि बिन काज न होय पर आधारित हिंदी भक्ति कविता, केदारनाथ भारतीय की  रचना
हरि सोचो से काज बने, हरि बिन काज न होय —हिंदी कविता

अमृतवाणी हिंदी कविता

आपनु सोचा होवे न, 
            हरि सोचा सब होय ।
हरि सोचो से काज बने, 
            हरि बिन काज न होय ।।

बृहद बड़ावन संपदा, 
            अपना कह बौराय ।
अपना तो हरि से हरा, 
            अपना कहां दिखाय ।।

लाभे लाभ मन पिरोये,
            मन से माया टेर ।
मन में माया मिढ़ गया, 
            झंझावत का ढेर ।।

क्षन क्षन झूमे तरुवर पाती, 
            नभ से बरसे मेघ ।
क्षन क्षन बदले सृष्टि दरपन,
             जिसमें हरि का भेष ।।

समय से पहले प्रकृति प्यारी, 
             कभी न ले विस्तार । 
समय से पहले आना-जाना, 
             संभव नहीं संस्सर ।। 

                     केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय 


जीवन में कई बार हम अपनी सोच और योजनाओं में उलझ जाते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हर कार्य भगवान की इच्छा से ही पूर्ण होता है।


यह भावपूर्ण कविता हमें हरि पर विश्वास रखने का संदेश देती है।


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लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय)

प्रस्तुति: नागेंद्र भारतीय

KEDAR KI KALAM 

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