क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।। ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे । केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,। शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...
यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।
।। हमारा गणतंत्र ।।
विधि कानून बिचार अगारा ।।
राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।
नाम भीम विधि विद्या ढारे ।।
यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।
।। हमारा गणतंत्र ।।
,,,,, कविता,,,,
यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।
विधि कानून बिचार अगारा ।।
राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।
नाम भीम विधि विद्या ढारे ।।
लोक विलोक लेख अति टेरी ।
दंभ नास अरि करत चिरौरी ।।
महाकाव्य विधि रचना भारी ।
दीर्घ सराह वर दीन्हा उचारी ।
दोहा,, लेख लेखनी लेखन विधि, प्रकृति का वरदान ।
आर्यावर्तम भारत खंडेहु, सदा बसेहु विद्वान ।।
चौपाई, ,,
पंडित नेहरू गांधी शास्त्री ।
लज्जित हुई दंभ की आधी ।।
जल गई मरयादा की बाती ।
लगी बिहसने मां की छाती ।।
अद्भुत लेख भीम कर लेखा ।
विशद विभव कानून सरेखा ।।
धन्य धन्य वह रामजी भीमा ।
ज्ञानी सुत दिए हिंद के नीमा ।।
दोहा,,
लिखत भुवाले चंद्र चपल अरु,
रवि भूषण गुण साथ ।
जगत रचयिता की रचना संघ,
आए दलित घर नाथ ।।
।। इति श्री ।।
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