लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी। डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष ।। प्रथम चरण ।। ...
Exam of the time कड़ी मेहनत, अथक संघर्ष और वर्षों की पढ़ाई के बावजूद गौरव प्रसाद आज भी सफलता की उस सीढ़ी तक नहीं पहुँच पाए थे, जिसकी उम्मीद उन्होंने बचपन से संजो रखी थी। अब उनकी उम्र लगभग 35 वर्ष हो चुकी थी। समय ने उनके सिर के बाल कम कर दिए थे, लेकिन संघर्ष का बोझ अभी भी उनके कंधों पर वैसा ही था। बढ़ती उम्र, परिवार की जिम्मेदारियाँ और बेरोज़गारी ने उनके सपनों को धीरे-धीरे हकीकत की कठोर जमीन पर ला खड़ा किया था। कभी उन्होंने भी सोचा था कि अच्छी शिक्षा उन्हें एक सम्मानजनक नौकरी दिलाएगी। फिर अपना घर होगा, जीवनसाथी होगा, बच्चों की किलकारियाँ होंगी और एक सुकून भरी ज़िंदगी उनका इंतज़ार करेगी। लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी। मेहनत उनकी थी, डिग्रियाँ उनकी थीं, सपने उनके थे—पर अवसर कहीं खो गए थे। जब व्यवस्था आम युवाओं की उम्मीदों से दूर हो जाए, तब सबसे अधिक कीमत उसी गरीब और मेहनतकश वर्ग को चुकानी पड़ती है, जिसके पास सपनों के अलावा कुछ नहीं होता। वर्ष 2040। सोमवार की रात रेलवे स्टेशन पर कंधे पर बैग लटकाए खड़ा गौरव अपने जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर था। सामने अनिश्चित भविष्य था और मन में एक ...