लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी। डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष ।। प्रथम चरण ।। ...
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| कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय |
।। दुख सुख ।। कविता ।।
दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा,
प्रेम की गंगा धारा है ।
निश्चल आत्म हितैषी वाणी,
मन का राज दुलारा है ।।
प्रेम की गंगा धारा है ।
निश्चल आत्म हितैषी वाणी,
मन का राज दुलारा है ।।
सबको याद है करता निशदिन,
मधुर मधुप रस घोलो से ।
दुख ही दुख की भाषा समझे,
मिलन करें मधु बोलो से ।।
दुख को देखें सुख जब भैया,
दुख से सुख कुछ दूर हटे ।
हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए,
हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।।
सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी,
दयाहीन पाषाण अधम ।
व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी,
याद करे न अपना परम ।।
इससे बेहतर दुख ही उत्तम,
सबकी सुधिया लेता है ।
मनोभाव सम्मान से जाकर,
सबको गले लगाता है ।।
केदारनाथ भारतीय
यह कविता जीवन के अनुभव और दर्द को बहुत सरल शब्दों में बताती है।
आज के समय में ऐसी सच्ची कविताएँ कम देखने को मिलती हैं।
केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय
(प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
यह कविता Kedar Ki Kalam ब्लॉग पर प्रकाशित की गई है। ऐसी ही और कविताएं पढ़ने के लिए
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