सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आज की विशेष कहानी

कुमुद: संस्कार, ममता और मानवीय रिश्तों का सफर|हिंदी कहानी

कुमुद: संस्कार, ममता और मानवीय रिश्तों की अनुपम गाथा लेखक: केदारनाथ भारतीय (उर्फ भुवाल भारतीय) "मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों, व्यवहार और प्रेम से होती है। कुछ लोग अपने जीवन में ऐसे आदर्श स्थापित कर जाते हैं कि उनका व्यक्तित्व पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुमुद भी ऐसा ही एक युवक था, जिसके मधुर स्वभाव, उच्च विचार और निष्कलंक चरित्र ने पूरे गाँव को एक परिवार के सूत्र में बाँध रखा था। प्रस्तुत है संस्कार, ममता, त्याग और मानवीय रिश्तों की भावनात्मक कहानी — ' कुमुद '।" कुमुद नाम का वह जवान और श्रेष्ठ लड़का,अपने अंतःउर में संस्कारों से परिपूर्ण सभ्यताओं का असीम सागर समेटे हुए था । उसके अधरों से सदा ही पवित्र मिलनसारिता और शिष्ट कुलीनता के अभय रस टपक रहे थे । उसकी मधुर मधुप रस बोलें,उसके ऊचे ऊचे बिचार, संपूर्ण ग्रामीण जनों में माताओं बहनों तथा पुरुष प्रधान समाज को,एक अद्भुत प्रेम भाईचारे का आश्चर्य में तिरोहित हृदय स्पर्शी संदेश दे रहे थे । वह कुमुद अपने अनुरागी बोल वचनों से जन जन को ऐसे बांध रखा था, जैसे कि वे लंबे लम्बे बांस,अ...

दुख ही दुख की भाषा समझे कविता | केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय

dukh hi dukh ki bhasha samjhe kavita kedarnath bharatiy hindi poem
कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे  
लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय


।। दुख सुख ।।  कविता ।।

दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा, 
              प्रेम की गंगा धारा है । 
निश्चल आत्म हितैषी वाणी, 
              मन का राज दुलारा है ।।

सबको याद है करता निशदिन, 
              मधुर मधुप रस घोलो से ।
दुख ही दुख की भाषा समझे, 
              मिलन करें मधु बोलो से ।। 

दुख को देखें सुख जब भैया, 
              दुख से सुख कुछ दूर हटे । 
हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए, 
              हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।। 

सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी, 
               दयाहीन पाषाण अधम । 
व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी, 
               याद करे न अपना परम ।। 

इससे बेहतर दुख ही उत्तम, 
               सबकी सुधिया लेता है ।
मनोभाव सम्मान से जाकर,
               सबको गले लगाता है ।।

                               केदारनाथ भारतीय 

यह कविता जीवन के अनुभव और दर्द को बहुत सरल शब्दों में बताती है।
आज के समय में ऐसी सच्ची कविताएँ कम देखने को मिलती हैं।
 केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय
(प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)

यह कविता Kedar Ki Kalam ब्लॉग पर प्रकाशित की गई है। ऐसी ही और कविताएं पढ़ने के लिए

Visit / Follow Blog

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विचित्र दुनिया–भाग 3|समय के जाल में राघव (हिंदी उपन्यास)

राघव इससे पहले कि कुछ समझ पाता, वह गिद्घ के चंगुल मे फस गया....  यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसके हर शब्द में एक सच्चाई की झलक छुपी है आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।
Home | About Us | Contact | Privacy | Disclaimer | Terms and conditions| Sitemap
© 2025–2026 kedarkahani.in | All Rights Reserved by Nagendra Bahadur Bharatiya