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आज की विशेष कहानी

दुख ही दुख की भाषा समझे कविता | केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय

कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे   लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय ।। दुख सुख ।।  कविता ।। दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा,                प्रेम की गंगा धारा है ।  निश्चल आत्म हितैषी वाणी,                मन का राज दुलारा है । सबको याद है करता निशदिन,                मधुर मधुप रस घोलो से । दुख ही दुख की भाषा समझे,                मिलन करें मधु बोलो से ।।  दुख को देखें सुख जब भैया,                दुख से सुख कुछ दूर हटे ।  हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए,                हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।।  सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी,                 दयाहीन पाषाण अधम ।  व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी,              ...

दुख ही दुख की भाषा समझे कविता | केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय

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कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे  
लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय


।। दुख सुख ।।  कविता ।।

दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा, 

              प्रेम की गंगा धारा है । 

निश्चल आत्म हितैषी वाणी, 

              मन का राज दुलारा है ।

सबको याद है करता निशदिन, 

              मधुर मधुप रस घोलो से ।

दुख ही दुख की भाषा समझे, 

              मिलन करें मधु बोलो से ।। 

दुख को देखें सुख जब भैया, 

              दुख से सुख कुछ दूर हटे । 

हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए, 

              हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।। 

सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी, 

               दयाहीन पाषाण अधम । 

व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी, 

               याद करे न अपना परम ।। 

इससे बेहतर दुख ही उत्तम, 

               सबकी सुधिया लेता है ।

मनोभाव सम्मान से जाकर,

               सबको गले लगाता है ।।

                               केदारनाथ भारतीय 

यह कविता जीवन के अनुभव और दर्द को बहुत सरल शब्दों में बताती है।
आज के समय में ऐसी सच्ची कविताएँ कम देखने को मिलती हैं।
 केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय
(प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)

यह कविता Kedar Ki Kalam ब्लॉग पर प्रकाशित की गई है। ऐसी ही और कविताएं पढ़ने के लिए

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