क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।। ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे । केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,। शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...
कुमुद: संस्कार, दोस्ती और मानवता की अद्भुत गाथा लेखक: केदारनाथ भारतीय (उर्फ भुवाल भारतीय) मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या वैभव से नहीं, बल्कि उसके संस्कार, व्यवहार और प्रेम से होती है। कुछ लोग अपने जीवन में ऐसे आदर्श स्थापित कर लेते हैं कि उनका व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। कुमुद भी ऐसा ही छात्र था, मधुर स्वभाव, उच्च विचार और निष्कलंक चरित्र ने पूरे गांव को एक परिवार के सूत्र में बांध देता था। संस्कार, नैतिकता, त्याग और मानवता की कहानी — ' कुमुद ' कुमुद नाम का वह जवान और श्रेष्ठ लड़का,अपने अंतःउर में संस्कारों से परिपूर्ण सभ्यताओं का असीम सागर समेटे हुए था । उसके अधरों से सदा ही पवित्र मिलनसारिता और शिष्ट कुलीनता के अभय रस टपक रहे थे । उसकी मधुर मधुप रस बोलें,उसके ऊचे ऊचे बिचार, संपूर्ण ग्रामीण जनों में माताओं बहनों तथा पुरुष प्रधान समाज को,एक अद्भुत प्रेम भाईचारे का आश्चर्य में तिरोहित हृदय स्पर्शी संदेश दे रहे थे । वह कुमुद अपने अनुरागी बोल वचनों से जन जन को ऐसे बांध रखा था, जैसे कि वे लंबे लम्बे बांस,अपनी जड़ों को आपस में एक दूसरों से...