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आज की विशेष कहानी

डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष – प्रथम चरण : वंदना

लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी।         डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष                  ।। प्रथम चरण ।।                   ...

आज के सुविचार:विशाल और सुंदर संसार

यह विशाल और सुंदर संसार आपकी रचना नहीं, यह रचना अद्भुत और अलौकिक है । यह अदृश्य ब्रह्म शक्तियों की रचना का समर्पण है, इस रचना में आप जितना भी पर्यटन कर सकते हैं कर ले किंतु ज्ञात रहे  आपका प्रत्येक पर्यटन, आपका प्रत्येक अवलोकन सृष्टि के सृजन हार की एक उपहार भेट इच्छा है ।  आप अपनी मर्जी से इस संसार में कुछ भी नहीं कर सकते । आपको  वह रचनाकार आपको जितनी  दूर तक सृष्टि दिखाएगा आपको जितनी दूर तक सृष्टि में घुमायेगा, बस आप उतनी ही दूरी तक सृष्टि देख सकेंगे उतरी है दूरी तक सृष्टि घूम सकेंगे ।  अर्थात आप अपनी इच्छा से  कुछ भी नहीं कर सकते । क्योंकि यदि अपनी ही इच्छा से सारे कार्य होते तो  यहां न कोई गरीब होता और न हीं कोई अमीर होता । वृक्ष भी अपने पत्ते अपनी इच्छा से कभी भी बड़े आराम से हिला डुला सकता था जिससे कि उसके पत्ते,उससे अलग होकर कहीं जमीन पर न टूट कर गिर पड़े ।          केदारनाथ भारतीय ( भुवाल भारतीय) 📖 और भी सुविचार पढ़ें

ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार

  ईश्वर की बनाई सृष्टि सबसे महान है | आज का सुविचार वह सृष्टि विनायक, वह ईश्वर, वह आदि और अनंता, एवं नभ वृंदारकों का श्रेष्ठ भूपति महानायक कितना महान है, कि वह हमें इतनी खूबसूरत सृष्टि में भेजने से पहले, हमारे लिए कितनी अच्छी-अच्छी व्यवस्थाएं पहले से ही बिना स्वार्थ समर्पित कर दिया था।

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"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

हमारा गणतंत्र – केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) की हिंदी राष्ट्रकाव्य कविता

।।हमारा गणतंत्र।। संविधान और विचारों को काव्य नमन—केदार नाथ भारतीय  यह गणतंत सौभाग्य हमारा ।          विधि कानून बिचार अगारा ।।            राष्ट्र आन विधि विरंचि पधारे ।             नाम भीम विधि विद्या ढारे ।। यह कविता हमारे संविधान, हमारे गणतंत्र और उन विचारों को नमन है जिन पर भारत खड़ा है। इसे पढ़ते समय शब्दों से अधिक भावों को महसूस करें।  (लेखक/कवि: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)
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