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आज की विशेष कहानी

डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष – प्रथम चरण : वंदना

लेखक: केदारनाथ भारतीय (भुवाल भारतीय) डॉ. भीमराव अंबेडकर – ज्ञान, समानता और संविधान के महान शिल्पकार। भारत के महान समाज सुधारक, संविधान निर्माता, विधिवेत्ता और करोड़ों लोगों के प्रेरणास्रोत डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान का अद्भुत उदाहरण है। प्रस्तुत काव्य-श्रृंखला "डॉ. भीमराव अंबेडकर का संघर्ष" आदरणीय केदारनाथ भारतीय द्वारा रचित एक मौलिक साहित्यिक कृति है। इस श्रृंखला में डॉ. अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के प्रति उनके महान योगदान को काव्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। आज इस श्रृंखला का प्रथम चरण – "वंदना" आपके समक्ष प्रस्तुत है। आशा है कि यह रचना आपको प्रेरित करेगी तथा डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व और कृतित्व को और निकट से समझने का अवसर प्रदान करेगी।         डॉ भीमराव अंबेडकर का संघर्ष                  ।। प्रथम चरण ।।                   ...

मेरी प्यारी माँ|भावनात्मक हिंदी कहानी

एक चिट्ठी माँ के नाम | भावनात्मक कहानी हिंदी में


सुबह के समय खिड़की के पास बैठा वीआईपी कपड़ों में एक नौजवान अपनी मां के लिए पत्र लिखता हुआ।
मां के नाम एक खत

जब भी मैं शाम की खिड़की पर बैठकर हवा को महसूस करता हूँ, तुम्हारी वह हँसी मेरे कानों में गूँज उठती है — वैसी ही, जो बचपन में मेरे घुटनों पर बैठकर रोटी पकाते समय तुम करती थीं। तुमने मुझे जो दुनिया दिखाई, वह रंगों से ज़्यादा भावनाओं से भरी थी। आज मैं तुम्हें एक चिट्ठी लिख रहा हूँ, माँ, जैसे कभी-कभी तुम्हारी आँखों में देखकर कहना भूल जाता हूँ।

माँ, मुझे याद है जब तुमने पहली बार मुझे विद्यालय भेजा था। तुम्हारी आँखों में गर्व और चिंता दोनों थे। तुमने कहा था — “बेटा, सीख लेना, दुनिया बड़ी है।” तब शायद मैं नहीं समझ पाया, पर आज समझता हूँ कि वही शब्द मेरे जीवन की नींव बने।

तुम्हारी सादगी और मेहनत ने मुझे सिखाया कि सफलता सिर्फ़ किताबों से नहीं आती, बल्कि ईमानदारी और धैर्य से मिलती है। तुम्हारे हाथों से बनी रोटी की खुशबू आज भी मुझे अपनेपन का एहसास देती है ।

माँ, जब पिता की तबीयत ख़राब थी, तब तुमने घर और उम्मीद दोनों को संभाला। तुम्हारी हिम्मत ने सिखाया कि औरत सिर्फ माँ नहीं, एक योद्धा भी होती है।

उन रातों में जब तुमने अपनी नींद कुर्बान की, मैं बच्चा था, पर तुम्हारी आँखों की थकान में भी विश्वास झलकता था। तुमने कभी हार नहीं मानी, और उसी जज़्बे ने मुझे आज तक मजबूत रखा।

जब मैं शहर आया, तो दुनिया बड़ी लगी। असफलता मिली, ठोकरें लगीं, पर तुम्हारे शब्द — “हार मत मानो, कोशिश करो” — मेरी राह बन गए। तुम्हारी चिट्ठियाँ मेरी सबसे बड़ी ताकत थीं, जो अंधेरे में दीपक बन जाती थीं।

माँ, जब पहली बार असफल हुआ, तो तुम्हारा चेहरा याद आया। तुम्हारी मुस्कान ने मुझे फिर से उठने की हिम्मत दी। आज जो भी लिखा है, वह तुम्हारे आशीर्वाद से है।

माँ, मैं जानता हूँ कि तुम्हारे त्याग का बदला कोई नहीं दे सकता। लेकिन मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारी हर कहानी, हर सीख और हर प्रेम को अपने लेखन में जीवित रखूँगा।

जब भी मैं कलम उठाता हूँ, तुम्हारी याद आती है। तुम्हारे बिना यह दुनिया अधूरी लगती है। मेरी हर रचना तुम्हारे नाम है — क्योंकि तुम ही मेरी प्रेरणा हो।

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लेखक: नागेन्द्र बहादुर भारतीय
ब्लॉगर | कहानीकार  
Website: https://www.kedarkahani.
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