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आज की विशेष कहानी

दोस्ती 3|राम मनोहर पंढरपुरी का सपना या हकीकत—केदार नाथ भारतीय की हिंदी कहानी

  क्या वह राजमहल सच था या टूटी हुई जिंदगी का एक सपना?  उसने बताया कि एक सप्ताह पहले यहां मेरी तीन बकरियां गुम हो गई थी, एक मिली और दो अभी नहीं मिल सकी है उन्हीं को ढूंढते–ढूंढते मैं यहां पहुंचा था, दूर से जब मैंने आपको देखा तो मुझे लगा कि शायद आप ही बकरियां चोर हैं आपके पास आया तो आप गहरी नींद में सो रहे थे, मैंने आपको उठाने का प्रयास किया तो आप उठे, किंतु आपने रामचंद्रन पंढरपुरी के विषय में जो कुछ भी हमें बताएं उसे सुनकर हमें भी गहरा सदमा पहुंचा है, हम भी भयभीत हो उठे हैं ।  यह कहानी केवल शब्दों का क्रम नहीं, बल्कि उन रिश्तों की गूंज है...आइए, इस दुर्गम पथ पर राम मनोहर के साथ चलें और दोस्ती के उस अर्थ को समझें जो हर मोड़ पर खुद को साबित करता है। लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज

मेरी प्यारी माँ|भावनात्मक हिंदी कहानी

एक चिट्ठी माँ के नाम | भावनात्मक कहानी हिंदी में


सुबह के समय खिड़की के पास बैठा वीआईपी कपड़ों में एक नौजवान अपनी मां के लिए पत्र लिखता हुआ।
मां के नाम एक खत

जब भी मैं शाम की खिड़की पर बैठकर हवा को महसूस करता हूँ, तुम्हारी वह हँसी मेरे कानों में गूँज उठती है — वैसी ही, जो बचपन में मेरे घुटनों पर बैठकर रोटी पकाते समय तुम करती थीं। तुमने मुझे जो दुनिया दिखाई, वह रंगों से ज़्यादा भावनाओं से भरी थी। आज मैं तुम्हें एक चिट्ठी लिख रहा हूँ, माँ, जैसे कभी-कभी तुम्हारी आँखों में देखकर कहना भूल जाता हूँ।

माँ, मुझे याद है जब तुमने पहली बार मुझे विद्यालय भेजा था। तुम्हारी आँखों में गर्व और चिंता दोनों थे। तुमने कहा था — “बेटा, सीख लेना, दुनिया बड़ी है।” तब शायद मैं नहीं समझ पाया, पर आज समझता हूँ कि वही शब्द मेरे जीवन की नींव बने।

तुम्हारी सादगी और मेहनत ने मुझे सिखाया कि सफलता सिर्फ़ किताबों से नहीं आती, बल्कि ईमानदारी और धैर्य से मिलती है। तुम्हारे हाथों से बनी रोटी की खुशबू आज भी मुझे अपनेपन का एहसास देती है ।

माँ, जब पिता की तबीयत ख़राब थी, तब तुमने घर और उम्मीद दोनों को संभाला। तुम्हारी हिम्मत ने सिखाया कि औरत सिर्फ माँ नहीं, एक योद्धा भी होती है।

उन रातों में जब तुमने अपनी नींद कुर्बान की, मैं बच्चा था, पर तुम्हारी आँखों की थकान में भी विश्वास झलकता था। तुमने कभी हार नहीं मानी, और उसी जज़्बे ने मुझे आज तक मजबूत रखा।

जब मैं शहर आया, तो दुनिया बड़ी लगी। असफलता मिली, ठोकरें लगीं, पर तुम्हारे शब्द — “हार मत मानो, कोशिश करो” — मेरी राह बन गए। तुम्हारी चिट्ठियाँ मेरी सबसे बड़ी ताकत थीं, जो अंधेरे में दीपक बन जाती थीं।

माँ, जब पहली बार असफल हुआ, तो तुम्हारा चेहरा याद आया। तुम्हारी मुस्कान ने मुझे फिर से उठने की हिम्मत दी। आज जो भी लिखा है, वह तुम्हारे आशीर्वाद से है।

माँ, मैं जानता हूँ कि तुम्हारे त्याग का बदला कोई नहीं दे सकता। लेकिन मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारी हर कहानी, हर सीख और हर प्रेम को अपने लेखन में जीवित रखूँगा।

जब भी मैं कलम उठाता हूँ, तुम्हारी याद आती है। तुम्हारे बिना यह दुनिया अधूरी लगती है। मेरी हर रचना तुम्हारे नाम है — क्योंकि तुम ही मेरी प्रेरणा हो।

अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो,  
तो इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करें।  
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लेखक: नागेन्द्र बहादुर भारतीय
ब्लॉगर | कहानीकार  
Website: https://www.kedarkahani.
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कहानियाँ जो दिल से निकलती हैं, उन्हें सुरक्षित रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। Stories that come from the heart, protecting them is our responsibility.

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