कविता – दुख ही दुख की भाषा समझे लेखक – केदारनाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय ।। दुख सुख ।। कविता ।। दुःख तो सुख से न्यारा प्यारा, प्रेम की गंगा धारा है । निश्चल आत्म हितैषी वाणी, मन का राज दुलारा है । सबको याद है करता निशदिन, मधुर मधुप रस घोलो से । दुख ही दुख की भाषा समझे, मिलन करें मधु बोलो से ।। दुख को देखें सुख जब भैया, दुख से सुख कुछ दूर हटे । हंसी उड़ाए मुंह. बिचकाए, हेय दृष्टि विष फुट पड़े ।। सुख हिंसक निष्ठुर अति कामी, दयाहीन पाषाण अधम । व्यवहार निरंकुश निरा उदंडी, ...
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है...
लाडो बहन की विदाई हिंदी गीत हर उस दिल को छू जाती है जिसने कभी अपनी बहन को विदा होते देखा है।
"केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय" एक संवेदनशील लेखक और कवि हैं,
जो रिश्तों, समाज और मानवीय भावनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास करते हैं।
![]() |
| बेटी की विदाई, घर की सबसे शांत घड़ी होती है। |
।। विदाई ।। लाडो बहन की विदाई गीत
तर्ज,, बाबुल का ये घर बहना,,,।
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है,,,2 ,
जाएगी छोड़ बहना,, 2 ,
दस्तूरे पियासी है ।
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है,,।। टेक ।।
मधु भाषी चहक जिसकी,
हम सबके बसेरों में,, 2,
छोड़ इन बसेरों को, , 2,
कल उड़े परवासी है,
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है ।। 1।।
बहन भोजन बनाती जो,
हम सबको बुलाती थी ,, 2 ,
ओ सबको खिला खाती,
सदा ताजा वा बासी है ।
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है ।। 2 ।।
कल बैठेगी डोली बहना,
भैया रोवेंगे गार नैना ,,2 ,
फूलों की ये नाजुक कली,
ममता से तरासी है ।
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है ।। 3 ।।
ये प्रकृति की कैसी माया,
बहना घर पराई है,, 2 ,
लिखते भुवाले रचना,, 2 ,
रचना क्यों रूहांसी है ।
लाडो बहन की विदाई से,
हम सबको उदासी है ।। 4 ।।
।। इति श्री ।।
अगर इस हिंदी गीत में आपको अपनी कहानी की झलक मिली हो,तो दो शब्द कमेंट में ज़रूर लिखिए।
आपकी भावना ही इस रचना की असली पूँजी है।
आपकी एक पंक्ति, मेरी अगली गीत की प्रेरणा बन सकती है।
अगर लगे कि यह किसी अपने तक पहुँचे—तो शेयर करना न भूलें।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कृपया अपनी राय साझा करें, लेकिन सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें।