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आज की विशेष कहानी

शब्दों की ताकत: ओह, आह, दर्द और दुख के पीछे हमारे पुरखों की अनुभव|सुविचार

क्या आप सभी में से किसी ने सोचा है कि भाषा सिर्फ बोलने का तरीका नहीं है ? हर शब्द के पीछे एक पूरी कहानी, एक अनुभव, एक एहसास छुपा होता है। हम रोज "ओह", "आह", "दुख", "सुख" जैसे शब्द बोलते हैं, लेकिन रुककर कभी महसूस किया है कि इन शब्दों को सुनते ही हमारा मन क्यों पिघल जाता है ? क्यों विश्व का कोई भी व्यक्ति, चाहे वो किसी भी देश का हो, इन शब्दों को सुनकर संवेदनशील हो जाता है? आज के इस सुविचार में हम इसी बात की गहराई में उतरेंगे। ।। मुख्य सुविचार ।।  ओह,आह,आश्चर्य, दर्द,पीड़ा, सुख और दुख, ऐसे शब्द हैं जिन्हें विश्व का कोई भी व्यक्ति सुनकर संवेदनशील हो सकता है,जैसे ये सारे शब्द, शब्द नहीं स्वयं में ही दर्द हो, आखिर ऐसे शब्दों को बनाने वाले हमारे पुरखे कितने अनुभव शील रहे होंगे ।                                    केदारनाथ ऊर्फ भुवाल,,,,,।  शब्दों के पीछे की कहानी जरा सोचिए, "ओह" शब्द सबसे पहले किसने बोला होगा? शायद हजारों साल पहले कोई पुरखा जंगल में शिकार कर रहा होगा। अचानक पैर में कांटा चुभा,...

लाडो बहन की विदाई पर भावुक—हिंदी गीत


लाडो बहन की विदाई से, 
          हम सबको उदासी है...

लाडो बहन की विदाई हिंदी गीत हर उस दिल को छू जाती है जिसने कभी अपनी बहन को विदा होते देखा है।
"केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय" एक संवेदनशील लेखक और कवि हैं,
जो रिश्तों, समाज और मानवीय भावनाओं को शब्दों में पिरोने का प्रयास करते हैं।
उनकी रचनाएँ कम शब्दों में गहरी अनुभूति छोड़ जाती हैं।
विदाई के समय माता-पिता अपनी दुल्हन बनी बेटी का हाथ थामे भावुक होते हुए।
बेटी की विदाई, घर की सबसे शांत घड़ी होती है।



।। विदाई ।। लाडो बहन की विदाई गीत

        तर्ज,, बाबुल का ये घर बहना,,,।

लाडो बहन की विदाई से, 
          हम सबको उदासी है,,,2 , 
  जाएगी छोड़ बहना,, 2 , 
                  दस्तूरे पियासी है । 
  लाडो बहन की विदाई से, 
        हम सबको उदासी है,,।। टेक ।।

  मधु भाषी चहक जिसकी, 
                  हम सबके बसेरों में,, 2,
  छोड़ इन बसेरों को, , 2, 
                 कल उड़े परवासी है,
 लाडो बहन की विदाई से,
       हम सबको उदासी है ।। 1।। 

 बहन भोजन बनाती जो, 
       हम सबको बुलाती थी ,, 2 , 
ओ सबको खिला खाती, 
        सदा ताजा वा बासी है । 
लाडो बहन की विदाई से, 
         हम सबको उदासी है ।। 2 ।।
 
कल बैठेगी डोली बहना, 
         भैया रोवेंगे गार नैना ,,2 , 
फूलों की ये नाजुक कली,
         ममता से तरासी है । 
लाडो बहन की विदाई से, 
         हम सबको उदासी है ।। 3 ।।

ये प्रकृति की कैसी माया,
         बहना घर पराई है,, 2 , 
लिखते भुवाले रचना,, 2 , 
         रचना क्यों रूहांसी है । 
लाडो बहन की विदाई से, 
         हम सबको उदासी है ।। 4 ।। 

                ।। इति श्री ।।



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