जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में शैशव काल बिता, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में मां का दूध पिया, वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई, वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में हो गये दादा दादी, वह दृश्य...
चपरासी बड़े अदब के साथ उसके पीछे-पीछे अंदर आया, चपरासी ने पूछा—साहब क्या बात है, आपने मुझे बुलाया । हां हमने बुलाया, क्या नाम है तुम्हारा, यहीं रहते हो, इधर आओ, ये लो खाली बोतल, सामने वाले नल से ताजा पानी ले आओ, वैसे तुम्हारा नाम चाहे जो कुछ भी हो किंतु हम तुम्हें रामु कह कर बुलाया करेंगे तुझे बुरा तो नहीं लगेगा । जब नफ़रत बोलती है, तब इंसानियत चुप हो जाती है — और जब इंसानियत बोलती है, तब पूरा हिंदुस्तान खड़ा हो जाता है। (लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय)