जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में शैशव काल बिता, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में मां का दूध पिया, वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई, वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा, वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता, वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में हो गये दादा दादी, वह दृश्य...
एक चिट्ठी माँ के नाम | भावनात्मक कहानी हिंदी में मां के नाम एक खत जब भी मैं शाम की खिड़की पर बैठकर हवा को महसूस करता हूँ, तुम्हारी वह हँसी मेरे कानों में गूँज उठती है — वैसी ही, जो बचपन में मेरे घुटनों पर बैठकर रोटी पकाते समय तुम करती थीं। तुमने मुझे जो दुनिया दिखाई, वह रंगों से ज़्यादा भावनाओं से भरी थी। आज मैं तुम्हें एक चिट्ठी लिख रहा हूँ, माँ, जैसे कभी-कभी तुम्हारी आँखों में देखकर कहना भूल जाता हूँ।