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आज की विशेष कहानी

केदारनाथ भारतीय(भुवाल भारतीय):जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया!

  जिस दृश्य में तुमने जन्म लिया,               वह दृश्य न आए दोबारा ।  जिस दृश्य में शैशव काल बिता,                वह दृश्य न आए दोबारा ।।   जिस दृश्य में मां का दूध पिया,                वह दृश्य न आये दोबारा । जिस दृश्य में जननी लोरी गाई,               वह दृश्य न आये दोबारा ।। जिस दृश्य में बचपन बीत गया,                वह दृश्य न आए दोबारा । जिस दृश्य में पाया गुरु से शिक्षा,                वह दृश्य न आए दोबारा ।। जिस दृश्य में परिणय बंधन तेरा,               वह दृश्य  न आए दोबारा । जिस दृश्य में बन गए मातु पिता,               वह दृश्य न आए दोबारा ।।  जिस दृश्य में हो  गये  दादा दादी,                वह  दृश्य...

विचित्र दुनिया—भाग 4|प्रेम–जाल (हिंदी उपन्यास)

“अरे! ये क्या…? पूरी चाय का रंग बदल गया था ।” वह घबरा कर बोला — “नहीं… नहीं… ऐसा नहीं हो सकता।  ये चाय… ये चाय कुछ ठीक नहीं लग रही… म… मैं ये नहीं पी सकता… बिल्कुल नहीं।” यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसके हर शब्द में एक सच्चाई की झलक छुपी है। आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।

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विचित्र दुनिया–भाग 3|समय के जाल में राघव (हिंदी उपन्यास)

राघव इससे पहले कि कुछ समझ पाता, वह गिद्घ के चंगुल मे फस गया....  यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, लेकिन इसके हर शब्द में एक सच्चाई की झलक छुपी है आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदारनाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से

"दोस्ती" 1|प्लेटफॉर्म नंबर चार की वह सर्द रात (हिंदी कहानी)

उस दिन राम रामचंद्रन के घर राम मनोहर पंढरपुरी की दोस्ती इस प्रकार से हुई थी,जैसे कि प्रकृति ने ही उन युगलों को भावनाओं से तिरोहित यह अनमोल रिश्ता,विरासत में सौंप दिया हो । किंतु इस बार वे ठीक तीन साल के बाद इस भयानक हिमपात से लब्ध कुहरे में उनके घर अकेले जा रहे थे । प्रिय पाठको,  मैं नागेंद्र भारती, आप सभी का इस नई कहानी “दोस्ती” में स्वागत करता हूँ।  यह कहानी सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं,  बल्कि उन पलों की सच्चाई है जहाँ एक अजनबी,   धीरे-धीरे दिल का सबसे करीबी बन जाता है। आइए, इस एहसास की यात्रा शुरू करें… ( लेखक: केदार नाथ भारतीय उर्फ भुवाल भारतीय, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज )

विचित्र दुनिया–भाग 2|राघव का बचपन और उसकी बेचैनी(हिंदी उपन्यास)

बेटे! शिक्षा से दुनिया झुक जाती हैं, जिसका वंदन- अभिनंदन सारा जगत करता है। शिक्षा के आगे संसार के सारे उद्योग बौने साबित हो जाते हैं। शिक्षा हैं तो दुनिया में सर्वश्रेष्ट् नाता है। अन्यथा सारा रिस्ता - नाता बिमाता के समान हो जाता हैं।  इसलिए शिक्षा बहुत जरूरी है,  अत: अब कल से स्कूल जाओगे की नहीं।    आप जिस कहानी को पढ़ रहे हैं, उसके लेखक हैं — केदार नाथ भारतीय, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से।
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